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सीएम धामी का आह्वान- 'सावन में नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन अवश्य करें'

ऋषिकेश के नजदीक पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है. यह धाम पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा माना जाता है. विशेष रूप से सावन के महीने में यह स्थान शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है.  

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उत्तराखंड: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर नीलकंठ महादेव मंदिर की महिमा का वर्णन करते हुए भक्तों से पौड़ी गढ़वाल आने पर इस पावन स्थल के दर्शन करने की अपील की है.   

'सावन में नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन अवश्य करें'

ऋषिकेश के नजदीक पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है. यह धाम पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा माना जाता है. विशेष रूप से सावन के महीने में यह स्थान शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है.  

देश के विभिन्न कोनों से लाखों शिवभक्त कांवड़ में पवित्र गंगाजल लेकर यहां पहुंचते हैं. वे भोलेनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और उनकी कृपा तथा आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल जनपद आने वाले सभी श्रद्धालु इस पावन मंदिर के दर्शन जरूर करें.


मंदिर ऋषिकेश से करीब 32 किलोमीटर दूर मणिकूट पर्वत पर मधुमती और पंकजा नदियों के संगम पर बसा है. पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने यहीं पान किया था. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ कहा जाता है. यह स्थान शिव की तपस्थली के रूप में भी जाना जाता है.  

सावन मास में यहां विशेष मेला और पूजा-अर्चना का आयोजन होता है. कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु पैदल या अन्य साधनों से पहुंचकर जल चढ़ाते हैं. मान्यता है कि इस दौरान किए गए जलाभिषेक और पूजा से विशेष पुण्य मिलता है. प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के कारण यह स्थल पर्यटकों और भक्तों दोनों को आकर्षित करता है.  

मुख्यमंत्री के इस संदेश से सावन के मौसम में नीलकंठ महादेव मंदिर की ओर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है. उत्तराखंड सरकार धार्मिक स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर भी ध्यान दे रही है.