सीएम धामी ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर किया नमन, बोले- 'रामचरितमानस आज भी लाखों घरों में पढ़ी और गाई जाती है...'

मुख्यमंत्री के इस संदेश में तुलसीदास जी के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान को याद किया गया है. गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना करके आम लोगों तक भगवान राम की कथा को सरल अवधी भाषा में पहुंचाया. इससे पहले राम कथा मुख्य रूप से संस्कृत में उपलब्ध थी, जिसे सामान्य जन आसानी से समझ नहीं पाते थे.

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उत्तराखंड: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर सोशल मीडिया पर अपना संदेश साझा किया. उन्होंने ट्वीट में लिखा कि चित्रकूट के घाट पर संतों की भीड़ में तुलसीदास चंदन घिसते थे और रघुवीर का तिलक करते थे. इस अवसर पर उन्होंने श्री रामचरितमानस के माध्यम से जन-जन को मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के आदर्श जीवन, त्याग, सत्य, धर्म और कर्तव्यपरायणता से परिचित कराने वाले तुलसीदास जी को कोटि-कोटि नमन किया.

सीएम धामी ने गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर किया नमन

मुख्यमंत्री के इस संदेश में तुलसीदास जी के जीवन और उनके साहित्यिक योगदान को याद किया गया है. गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना करके आम लोगों तक भगवान राम की कथा को सरल अवधी भाषा में पहुंचाया. इससे पहले राम कथा मुख्य रूप से संस्कृत में उपलब्ध थी, जिसे सामान्य जन आसानी से समझ नहीं पाते थे. तुलसीदास जी ने अपनी रचना के जरिए राम के आदर्शों- सत्य का पालन, धर्म की रक्षा, माता-पिता के प्रति कर्तव्य, भाईचारे का भाव और त्याग की भावना को समाज में फैलाया.


रामचरितमानस आज भी लाखों घरों में पढ़ी और गाई जाती है. यह ग्रंथ न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी देता है. तुलसीदास जी ने चित्रकूट जैसे पवित्र स्थानों पर साधना की और संतों के संग रहकर भक्ति का प्रचार किया. मुख्यमंत्री धामी ने अपने ट्वीट में इन्हीं पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे महान संत के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं.

जयंती के मौके पर पूरे देश में तुलसीदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है. लोग रामचरितमानस का पाठ करते हैं, भजन गाते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं. मुख्यमंत्री के संदेश से उत्तराखंड में भी इस अवसर की महत्ता और बढ़ गई है. राज्य में राम भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

तुलसीदास जी का संदेश समय के साथ और भी महत्वपूर्ण हो गया है. आज के युग में जब समाज में कई चुनौतियां हैं, तब रामचरितमानस से मिलने वाली शिक्षाएं- ईमानदारी, सेवा भाव और कर्तव्य निभाना मार्गदर्शन का काम करती हैं. मुख्यमंत्री धामी के ट्वीट ने इन मूल्यों को फिर से याद दिलाया है.