उत्तराखंड में बड़ा बदलाव? मदरसा बोर्ड खत्म; अब कुरान के साथ लैपटॉप भी होगा छात्रों के हाथ में

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के साथ राज्य में मदरसा शिक्षा का नया दौर शुरू हो गया है. अब मदरसों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिलेगी और छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाएगा.

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Reepu Kumari

उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है. राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी है. इसके साथ ही उत्तराखंड ऐसा कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. अब मदरसों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता मिलेगी और छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में नई शुरुआत होगी. नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों की पढ़ाई भी अनिवार्य होगी. सरकार का कहना है कि इससे छात्रों को भविष्य में उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे. साथ ही मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाएगा.

अब नहीं रहेंगी केवल पारंपरिक डिग्रियां

अब तक मदरसा बोर्ड से मिलने वाली मुंशी, मौलवी और आलिम जैसी डिग्रियों को उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मान्यता नहीं मिलती थी. इन्हीं सीमाओं को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है. अब छात्र धार्मिक शिक्षा जारी रखते हुए डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकेंगे. सरकार का मानना है कि इससे मदरसा छात्रों के लिए नए रास्ते खुलेंगे.

आधुनिक विषय होंगे पढ़ाई का हिस्सा

नई शिक्षा व्यवस्था के तहत मदरसों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाएगा. इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑडियो-वीडियो सामग्री, क्यूआर कोड और तकनीकी संसाधनों के जरिए भी पढ़ाई कराई जाएगी. उद्देश्य यह है कि छात्र धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक और बदलते समय की जरूरतों से भी परिचित हों.


जीवन मूल्यों और संविधान पर भी रहेगा फोकस

नई व्यवस्था में केवल अकादमिक विषय ही नहीं, बल्कि संविधान, नागरिक कर्तव्य, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, महिला सम्मान, नशामुक्ति और सामाजिक जिम्मेदारियों जैसे विषय भी शामिल किए गए हैं. विद्यार्थियों को सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, फेक न्यूज की पहचान और डिजिटल नैतिकता की भी जानकारी दी जाएगी.

मान्यता के लिए तय होंगे नए मानक

अब मदरसों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी. इसके लिए संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा. सरकार के अनुसार जो संस्थान आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक मानदंड पूरे करेंगे, उन्हें मान्यता प्रदान की जाएगी. वहीं पहले से शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों को मिड-डे मील जैसी सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी.

सरकार ने बताया शिक्षा सुधार की नई पहल

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें आधुनिक अवसरों से जोड़ना है. मुख्यमंत्री ने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और समाज के सभी वर्गों से इस पहल को सफल बनाने की अपील की है. सरकार का दावा है कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक ज्ञान का समावेश छात्रों के भविष्य को अधिक मजबूत बनाएगा.