नैनीताल में पहली बार दिखा अजगर का बच्चा, ठंडे इलाके में पहुंची यह प्रजाति; वन विभाग भी हैरान
उत्तराखंड के नैनीताल में पहली बार अजगर का बच्चा मिलने से लोगों के साथ वन विभाग भी हैरान रह गया. अयारपाटा क्षेत्र में सड़क किनारे मिले इस अजगर के बच्चे का वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर चिड़ियाघर भेज दिया है.
उत्तराखंड के नैनीताल में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्थानीय लोगों के साथ वन विभाग का भी ध्यान खींच लिया. शहर के अयारपाटा क्षेत्र में अजगर का एक बच्चा मिलने से इलाके में कौतूहल का माहौल बन गया. यह क्षेत्र नैनीताल के सबसे ठंडे इलाकों में गिना जाता है. वन विभाग के अनुसार, नैनीताल में इस प्रजाति की मौजूदगी का यह संभवत: पहला रिकॉर्ड है. सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अजगर के बच्चे का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे चिड़ियाघर भेज दिया. बाद में उसे मैदानी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा जाएगा.
सड़क किनारे हलचल देख जुट गई लोगों की भीड़
शनिवार शाम अयारपाटा क्षेत्र में देवी कॉटेज के पास लोगों ने सड़क किनारे किसी सांप जैसी हलचल देखी. सूचना मिलने पर क्षेत्रीय सभासद मनोज साह जगाती भी मौके पर पहुंचे. देखते ही देखते आसपास के लोग वहां इकट्ठा हो गए और मामले की जानकारी वन विभाग को दी गई.
वन विभाग ने की बर्मीज पाइथन की पुष्टि
मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने जांच के बाद पुष्टि की कि यह अजगर का बच्चा है. इसकी पहचान होते ही लोगों में उत्सुकता और बढ़ गई, क्योंकि नैनीताल जैसे ठंडे क्षेत्र में इस प्रजाति का मिलना बेहद असामान्य माना जा रहा है.
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विशेषज्ञों ने बताई संभावित वजह
वन्यजीव विशेषज्ञ की मानें तो अजगर दुनिया की सबसे बड़ी सांप प्रजातियों में शामिल है. सामान्य तौर पर यह भुजियाघाट, ज्योलीकोट और कालाढूंगी जैसे मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है. उनका मानना है कि यह बच्चा संभवत: किसी वाहन के जरिए यहां पहुंचा होगा.
बढ़ते तापमान को भी माना जा रहा कारण
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में बढ़ते तापमान के कारण गर्म क्षेत्रों में रहने वाले कुछ वन्यजीव ऊंचाई वाले इलाकों की ओर पहुंच सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में यह केवल एक संभावित कारण है और इसकी निश्चित पुष्टि नहीं की जा सकती.
रेस्क्यू के बाद चिड़ियाघर भेजा गया अजगर
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अजगर के बच्चे को सुरक्षित पकड़कर चिड़ियाघर भेज दिया गया है. वहां आवश्यक निगरानी के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास यानी मैदानी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा जाएगा. विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के दिखने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत सूचना दें.