23 हारी सीटों पर भाजपा की नजर, उत्तराखंड में 2027 से पहले नितिन नवीन करेंगे संगठन की ताकत का टेस्ट

उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लक्ष्य के साथ भाजपा संगठन की जमीनी स्थिति परखने की तैयारी में है. राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को प्रदेश दौरे पर रहेंगे.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अब संगठन की तैयारियों की समीक्षा शुरू करने का संकेत दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को उत्तराखंड पहुंचेंगे. इस दौरे में केवल चुनावी कार्यक्रमों की जानकारी लेना ही मकसद नहीं होगा, बल्कि पिछले डेढ़ से दो साल में संगठन ने जमीन पर कितना काम किया, इसकी भी पड़ताल हो सकती है. बूथ स्तर की सक्रियता से लेकर कमजोर विधानसभा क्षेत्रों तक की स्थिति पर फीडबैक लिया जाएगा.

भाजपा की कोशिश कमजोर बूथों को चिह्नित कर वहां संगठन को मजबूत करने की है. नितिन नवीन यह जान सकते हैं कि बूथ समितियां वास्तव में कितनी सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं का क्षेत्र में प्रवास कितना बढ़ा है. मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क भी समीक्षा का हिस्सा हो सकता है. यानी इस बार कागजी रिपोर्ट के बजाय बूथ से विधानसभा स्तर तक की वास्तविक स्थिति को ज्यादा महत्व दिए जाने की संभावना है.

23 सीटों पर वापसी की चुनौती

2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए भाजपा को अपनी मौजूदा सीटें बचाने के साथ पिछली बार हारी 23 सीटों पर भी वापसी करनी होगी. यही क्षेत्र पार्टी की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के दौरान इन सीटों पर संगठन की स्थिति, स्थानीय समीकरण और कार्यकर्ताओं की सक्रियता की रिपोर्ट ली जा सकती है. जहां कमजोरी मिलेगी, वहां अलग रणनीति तैयार होने की संभावना है.


विधायकों की सक्रियता भी कसौटी पर

संगठन के साथ विधायकों के कामकाज और क्षेत्र में उनकी सक्रियता पर भी नजर रह सकती है. पार्टी यह देखना चाहती है कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच कितने सक्रिय हैं और संगठन के साथ उनका तालमेल कैसा है. आगामी चुनावी कार्यक्रमों को लेकर भी प्रदेश संगठन से विस्तृत जानकारी ली जा सकती है. कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में जिम्मेदारियां बदलने या अतिरिक्त संगठनात्मक दायित्व सौंपने की संभावना भी चर्चा में है.

डेढ़ साल की मेहनत का हिसाब

नवीन के दौरे को भाजपा के लिए पिछले डेढ़ से दो साल की संगठनात्मक मेहनत का हिसाब लेने के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी ने बूथों को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और मतदाताओं से संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया है. अब नेतृत्व यह समझना चाहता है कि इन प्रयासों का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति में बदलाव किया जा सकता है.

2027 के साथ 2029 पर भी नजर

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले 2027 में होने हैं, लेकिन भाजपा की रणनीति इससे आगे 2029 के लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रख सकती है. लगातार तीसरी सरकार के लक्ष्य के लिए संगठन को हर स्तर पर मजबूत करना पार्टी की प्राथमिकता होगी. नितिन नवीन के दौरे से यह साफ हो सकता है कि किन क्षेत्रों को तत्काल मजबूती की जरूरत है और किन नेताओं या कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है.