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उत्तराखंड का यह चमत्कारी मंदिर, जहां मां अगनेरी के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता; CM धामी ने भी किया नमन

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा स्थित ऐतिहासिक अगनेरी माता मंदिर को प्रदेश की प्रमुख आस्था स्थली बताते हुए श्रद्धालुओं से यहां दर्शन करने की अपील की है.

@pushkardhami
Reepu Kumari

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रामगंगा नदी के पावन तट पर स्थित अगनेरी माता मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस ऐतिहासिक धाम का उल्लेख करते हुए इसे श्रद्धा, आस्था और विश्वास का अद्वितीय केंद्र बताया. मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अल्मोड़ा आने पर अगनेरी माता के दर्शन करने की अपील की. कत्यूरी काल से जुड़ा यह प्राचीन मंदिर धार्मिक महत्व के साथ साथ अपनी ऐतिहासिक विरासत और शांत आध्यात्मिक वातावरण के लिए भी विशेष पहचान रखता है.

CM धामी की खास अपील 

सीएम धामी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा 'चौखुटिया, अल्मोड़ा में रामगंगा नदी के पावन तट पर स्थित अगनेरी माता मंदिर श्रद्धा, आस्था और विश्वास का अद्वितीय केंद्र है। कत्यूरी काल की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा यह प्राचीन मंदिर माँ अगनेरी को समर्पित है और अपनी दिव्यता, आध्यात्मिक वातावरण तथा सांस्कृतिक महत्ता के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. अल्मोड़ा आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें.


रामगंगा तट पर बसा सदियों पुराना आस्था का केंद्र

गेवाड़ घाटी में स्थित अगनेरी माता मंदिर लंबे समय से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. रामगंगा नदी के किनारे होने के कारण यहां पूरे वर्ष दूर दूर से भक्त पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर अपनी धार्मिक परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है.

कत्यूरी काल से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

मान्यता है कि अगनेरी माता मंदिर का निर्माण कत्यूरी शासनकाल में हुआ था. हालांकि स्थानीय जानकारों के अनुसार यहां कत्यूरी काल से पहले भी एक छोटा मंदिर मौजूद था. वर्ष 1900 के आसपास स्थानीय लोगों ने इसका जीर्णोद्धार कर इसे नया स्वरूप दिया. उस समय यहां अष्टभुजा महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे वर्ष 1970 में चोरी कर लिया गया. बाद में मंदिर में मां काली की नई प्रतिमा स्थापित की गई.

गणेश प्रतिमा से भी जुड़ी है खास मान्यता

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कत्यूरी राजा सोमदेव ने वर्ष 1276 में मंदिर के पास विशाल गणेश प्रतिमा स्थापित कराई थी. बाद में रामगंगा में आई बाढ़ के कारण यह प्रतिमा तिरछी हो गई, लेकिन आज भी वहीं मौजूद है. इसे क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

हर साल लगता है भव्य चैत्राष्टमी मेला

अगनेरी मंदिर परिसर में हर वर्ष चैत्र नवरात्र के दौरान विशाल चैत्राष्टमी मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पूरे साल यहां धार्मिक अनुष्ठान, कथा और पूजा अर्चना का सिलसिला चलता रहता है.

मंदिर को मिलेगा और भव्य स्वरूप

मंदिर समिति परिसर का विकास तेजी से करा रही है. मुख्य मंदिर के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए यहां विशाल सत्संग भवन, नौ दुर्गाओं की प्रतिमाओं का संग्रहालय और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. साथ ही मंदिर के इतिहास को दर्शाने वाला बड़ा शिलापट भी तैयार किया जा रहा है, ताकि आने वाले श्रद्धालु इस धाम की ऐतिहासिक विरासत को करीब से जान सकें.