आदि कैलाश का बढ़ता क्रेज! 300 से 50 हजार पार पहुंचे यात्री, अब हवाई सेवा से होगी आसान यात्रा
उत्तराखंड के आदि कैलाश में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. कभी सालभर में 300 से कम यात्री पहुंचते थे, वहीं अब संख्या 50 हजार पार कर चुकी है. बढ़ती मांग को देखते हुए हवाई सेवा और नए पर्यटन ढांचे की तैयारी चल रही है.
पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश अब देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. श्रद्धालुओं और पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या ने सरकार और पर्यटन विभाग को नई सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रेरित किया है. इसी क्रम में हवाई सेवा शुरू करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
पर्यटकों की बढ़ती संख्या ने बदली तस्वीर
आदि कैलाश का नाम अब देशभर के श्रद्धालुओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. कुछ वर्ष पहले तक यहां पहुंचना काफी कठिन माना जाता था और हर साल बहुत कम लोग इस यात्रा पर निकलते थे. वर्ष 2019 में यहां केवल 322 यात्री पहुंचे थे. लेकिन समय के साथ सड़क संपर्क बेहतर हुआ और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला. वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद इस क्षेत्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई. इसका असर यह हुआ कि पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई. वर्ष 2025 में अब तक 52 हजार से अधिक यात्री यहां पहुंच चुके हैं और आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
हवाई सेवा और आधारभूत ढांचे पर जोर
पर्यटकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सरकार और संबंधित एजेंसियां नई सुविधाओं के विकास पर काम कर रही हैं. यात्रा को अधिक सुगम बनाने के लिए हवाई सेवा शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है. पर्यटन विभाग का मानना है कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां बेहतर परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता है. इसी के साथ ठहरने, भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए नए निर्माण कार्य भी प्रस्तावित किए गए हैं. आने वाले समय में यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा अनुभव देने का लक्ष्य रखा गया है.
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स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बड़ा सहारा
आदि कैलाश में बढ़ते पर्यटन का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय लोगों को मिल रहा है. गांवों में होमस्टे, छोटे होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और कई लोग शहरों से वापस अपने गांव लौट रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि हवाई सेवा शुरू होने से केवल आदि कैलाश ही नहीं, बल्कि ओम पर्वत और लिपू दर्रा जैसे अन्य महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी. इससे पूरे क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है.