आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा ने रचा नया इतिहास, श्रद्धालुओं की संख्या पहली बार पहुंची 50 हजार के पार

प्रशासन के अनुसार इस बार मार्ग पर कोई बड़ी बाधा नहीं आई. सिर्फ एक बार मलघाट के पास पहाड़ से पत्थर गिरने की घटना हुई, जिससे कुछ घंटों के लिए यात्री रुक गए. बाकी पूरे समय यात्रा सुचारू रूप से चल रही है. मौसम भी काफी अनुकूल बना हुआ है.

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पिथौरागढ़: उत्तराखंड की आदि कैलास और ओम पर्वत यात्रा ने इस बार अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. पहली बार इस यात्रा में 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच चुके हैं. यह संख्या पिछले साल के पूरे सत्र से भी ज्यादा है। यात्रा अभी भी जारी है और अच्छा मौसम रहा तो इस बार कुल संख्या एक लाख के करीब पहुंचने की उम्मीद है.

आदि कैलास-ओम पर्वत यात्रा में श्रद्धालु पहुंचे 50 हजार के पार

अभी तक 56 दिनों में 50,521 श्रद्धालुओं ने आदि कैलास और ओम पर्वत के दर्शन किए हैं. पिछले साल पूरे यात्रा सत्र में कुल 36,600 यात्री पहुंचे थे. इस बार यात्रा शुरू होने के महज 39वें दिन ही पिछले साल की कुल संख्या पार कर ली गई थी. यह आंकड़े यात्रा को नई ऊंचाई देते दिख रहे हैं.

प्रशासन के अनुसार इस बार मार्ग पर कोई बड़ी बाधा नहीं आई. सिर्फ एक बार मलघाट के पास पहाड़ से पत्थर गिरने की घटना हुई, जिससे कुछ घंटों के लिए यात्री रुक गए. बाकी पूरे समय यात्रा सुचारू रूप से चल रही है. मौसम भी काफी अनुकूल बना हुआ है. पिछले सालों में जून के तीसरे सप्ताह से पहले मानसून की बारिश शुरू हो जाती थी, जिससे रास्ते बंद होने लगते थे. लेकिन इस बार सीमांत क्षेत्र में बारिश औसत से सामान्य है, जिससे यात्रियों को सुविधा मिल रही है.


आदि कैलास और ओम पर्वत की यात्रा भक्तों के लिए बेहद खास मानी जाती है. यहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिक अनुभव भी मिलता है. ओम पर्वत की चोटी पर बर्फ से बना स्वाभाविक ओम का चिन्ह श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. आदि कैलास को भगवान शिव का प्राचीन निवास माना जाता है.

इस बार दोनों यात्राओं के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी भी जोरों पर है. 6 जून को पहला दल पिथौरागढ़ पहुंचने वाला है. दोनों यात्राओं का रास्ता गुंजी तक एक समान है. इसलिए उच्च हिमालयी व्यास घाटी में इन दिनों काफी चहल-पहल देखने को मिल रही है.