सैलरी तो दूर, टॉयलेट जाने तक की सुविधा नहीं! नोएडा-फरीदाबाद में प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने सुनाई आपबीती

नोएडा से फरीदाबाद तक प्राइवेट कंपनी कर्मचारियों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. कम सैलरी, खराब सुविधाएं और शोषण के आरोपों के बीच विरोध प्रदर्शन कई जगह उग्र हो गया.

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Kuldeep Sharma

नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम और राजस्थान के भिवाड़ी-अलवर में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है. कई दिनों से चल रहा विरोध सोमवार को नोएडा में हिंसक हो गया, जहां सड़कों पर जाम, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं देखने को मिलीं. कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से कम वेतन, खराब भोजन, मोबाइल पर पाबंदी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

सड़क पर उतरा गुस्सा और बिगड़ते हालात

तीन दिनों से सुलग रहा विरोध सोमवार को अचानक उग्र हो गया और नोएडा के औद्योगिक इलाकों में हालात बेकाबू हो गए. प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ. कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी. इसी बीच फरीदाबाद, गुरुग्राम और भिवाड़ी-अलवर में भी कर्मचारी अपने-अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं. यह प्रदर्शन केवल वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि काम के माहौल और व्यवहार से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को लेकर भी है.

कम सैलरी और बढ़ता असंतोष

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि उनकी सैलरी कई वर्षों से नहीं बढ़ी है. फरीदाबाद के एक कर्मचारी ने बताया कि उनकी शुरुआती सैलरी 11 हजार रुपये थी, जो आज भी लगभग वहीं की वहीं है. कई कर्मचारियों का दावा है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी वेतन में मामूली या कोई बढ़ोतरी नहीं हुई. कुछ का आरोप है कि रिकॉर्ड में ज्यादा वेतन दिखाया जाता है, जबकि वास्तविक भुगतान काफी कम होता है. इससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

काम के हालात और बुनियादी सुविधाओं की कमी

कर्मचारियों ने काम के माहौल को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि फैक्ट्रियों में न तो अच्छा खाना मिलता है और न ही साफ पानी की व्यवस्था है. कई जगहों पर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती, जिससे आपात स्थिति में परिवार से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है. कुछ कर्मचारियों ने बताया कि बीमारी की हालत में भी छुट्टी लेना आसान नहीं होता और इसके लिए कई स्तर की अनुमति लेनी पड़ती है. शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ी समस्या बताई गई है.

डर, दबाव और भविष्य की अनिश्चितता

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मैनेजमेंट की ओर से दबाव और धमकियां दी जाती हैं. छोटी-छोटी बातों पर नौकरी से निकालने की चेतावनी दी जाती है, जिससे कर्मचारी मानसिक तनाव में रहते हैं. कई लोग वर्षों से काम करने के बावजूद स्थायी नहीं किए गए हैं. एक महिला कर्मचारी ने बताया कि 10-12 घंटे काम कराने के बावजूद वेतन बहुत कम है. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा और वे अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहेंगे.