वृन्दावन थाने में पुलिस की तानाशाही का आरोप, 7 युवकों को 4 दिन से हिरासत में रखा; परिजनों से बदसलूकी
यूपी की धार्मिक नगरी वृन्दावन में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मध्य प्रदेश के गंजबासौदा से दर्शन करने आए 7 युवकों को चोरी के आरोप में हिरासत में लेकर पिछले चार दिनों से थाने में बैठाए रखने का मामला अब तूल पकड़ चुका है.
वृन्दावन: यूपी की धार्मिक नगरी वृन्दावन में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. मध्य प्रदेश के गंजबासौदा से दर्शन करने आए 7 युवकों को चोरी के आरोप में हिरासत में लेकर पिछले चार दिनों से थाने में बैठाए रखने का मामला अब तूल पकड़ चुका है. परिजनों का आरोप है कि पुलिस बिना पुख्ता सबूत के युवकों को जबरन फंसा रही है और पूरी तरह मनमानी पर उतर आई है.
सबसे बड़ा आरोप यह है कि चार दिनों से परिजनों को न तो अपने बच्चों से मिलने दिया जा रहा है और न ही पुलिस कोई स्पष्ट जवाब दे रही है. थाने के बाहर डेरा डाले परिजन भूखे-प्यासे अपने बच्चों की एक झलक के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है.
परिजनों का सब्र का बांध टूटा:
आज मंगलवार को जब परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने कोतवाली प्रभारी से जवाब मांगा, और उन्हें कोतवाली प्रभारी द्वारा संतोष जनक जवाब नहीं मिला.तो हालात बेकाबू हो गए. इसी दौरान एक महिला अपने बेटे की चिंता में थाने परिसर में ही बेहोश हो गई. आरोप है कि इस संवेदनशील स्थिति में भी पुलिस का रवैया नरम पड़ने के बजाय और सख्त हो गया.
विरोध करने पर लाठीचार्ज की धमकी:
हेड मोहर्रम समेत कई पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित परिजनों के साथ धक्का-मुक्की की, उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की और विरोध करने पर लाठीचार्ज की धमकी तक दे डाली. यानी न्याय की गुहार लगाने पहुंचे लोगों को ही दबाने का प्रयास किया गया.
मामला तब और गर्मा गया जब मौके पर पहुंचे मीडियाकर्मियों ने पूरी घटना को कैमरों में कैद कर लिया. अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या वृन्दावन पुलिस कानून के दायरे में काम कर रही है या फिर अपनी ‘तानाशाही’ चला रही है.