उत्तर प्रदेश ने बिजली खपत के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है. राज्य में रविवार देर रात बिजली की अधिकतम मांग 32348 मेगावॉट दर्ज की गई, जो अब तक देश में किसी भी राज्य द्वारा दर्ज की गई सबसे अधिक बिजली मांग मानी जा रही है. इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह प्रदेश की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और बिजली व्यवस्था की क्षमता को दर्शाता है.
जानकारी के अनुसार इससे पहले देश में सबसे अधिक बिजली मांग का रिकॉर्ड महाराष्ट्र के नाम था. महाराष्ट्र में 13 मई को अधिकतम बिजली मांग 32317 मेगावॉट दर्ज की गई थी. अब उत्तर प्रदेश ने 32348 मेगावॉट की मांग दर्ज कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. ऊर्जा मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेश की जनता, बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है. प्रदेश में बढ़ती गर्मी और उमस के कारण बिजली की खपत में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. लगभग दस दिनों के बाद बिजली की मांग एक बार फिर 31 हजार मेगावॉट के पार पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने के साथ बिजली की मांग में और इजाफा हो सकता है. ऐसे में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
बढ़ती मांग के बीच राज्य के चार बिजली उत्पादन संयंत्र बंद रहे, जिसके कारण अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था एक्सचेंज और अन्य स्रोतों से करनी पड़ी. उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. हालांकि बढ़ते लोड के कारण कई इलाकों में तकनीकी समस्याएं भी सामने आ रही हैं. बिजली की मांग बढ़ने का असर वितरण व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है. कई स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर फुंकने, केबल जलने और एबीसी लाइन में खराबी जैसी घटनाएं सामने आई हैं. बीते दो दिनों में फॉल्ट की संख्या बढ़ने से कई इलाकों में लोगों को बिजली कटौती और आपूर्ति बाधित होने की समस्या का सामना करना पड़ा. गर्मी के मौसम में बिजली बाधित होने से उपभोक्ताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है.
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि मानसून के दौरान उमस बढ़ने पर बिजली की मांग वर्तमान स्तर से भी अधिक हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जाए और पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित हो तो फॉल्ट की समस्या को कम किया जा सकता है. प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली मांग दर्ज होना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ ही निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. आने वाले दिनों में बढ़ती मांग, तकनीकी चुनौतियां और उत्पादन क्षमता के बीच संतुलन बनाए रखना बिजली विभाग और पावर कॉरपोरेशन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है.