यूपी पुलिस परीक्षा में 'पंडित' विकल्प पर छिड़ा सियासी घमासान, योगी सरकार ने दिए सख्त जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द को विवादित विकल्प के रूप में शामिल करने पर बड़ा हंगामा खड़ा हो गया है. सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में शनिवार को आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न ने प्रदेश में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. हिंदी व्याकरण के एक सवाल में 'पंडित' शब्द के आपत्तिजनक उपयोग पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने भारी विरोध दर्ज कराया है. सरकार ने इसे सामाजिक गरिमा और सद्भाव के खिलाफ मानते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है. उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

परीक्षा में अभ्यर्थियों से पूछा गया था कि 'अवसर के अनुसार बदल जाने वाले' व्यक्ति के लिए एक शब्द क्या होगा. इस प्रश्न के विकल्पों में 'पंडित' शब्द को शामिल किया गया था, जिसे ब्राह्मण समाज ने अपनी गरिमा पर सीधी चोट माना है. इस सवाल के वायरल होते ही विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है. यह मामला अब शैक्षणिक से अधिक सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है.

सरकार का कड़ा रुख 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि अपमानजनक शब्दावली के लिए शासन में कोई स्थान नहीं है. उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सभी वर्गों की गरिमा के प्रति संवेदनशील है. पाठक ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी जाति या परंपरा का अनादर कतई स्वीकार्य नहीं होगा और इसकी पूरी जवाबदेही तय की जाएगी.

जांच के घेरे में जिम्मेदार 

घटना के तुरंत बाद जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है. जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्न पत्र तैयार करने के दौरान यह गंभीर त्रुटि किस स्तर पर हुई. सरकार का स्पष्ट मत है कि जो भी व्यक्ति इस संकीर्ण मानसिकता के पीछे है, उसे बख्शा नहीं जाएगा. यह कदम भविष्य की परीक्षाओं में ऐसी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए उठाया जा रहा है.

समाज में बढ़ता आक्रोश 

भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व महामंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोषियों को जेल भेजने की मांग की है. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज का देश के विकास और आजादी में बड़ा योगदान रहा है, इसलिए उन्हें बार-बार निशाना बनाना निंदनीय है. इस मुद्दे ने पूरे राज्य में सामाजिक एकजुटता और सम्मान की रक्षा के लिए एक नई बहस को जन्म दे दिया है.