उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के लिए बड़ी प्रोत्साहन योजना सामने आई है. गांव में विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कामों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को मुख्यमंत्री विशेष पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाएगा. इसके तहत प्रदेश की 10 पंचायतों को 50-50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी, जो सीधे पंचायत के खाते में भेजी जाएगी.
मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए इच्छुक ग्राम पंचायतों को 15 सितंबर तक आवेदन करना होगा. आवेदन मुख्यमंत्री अवार्ड पोर्टल के जरिए ऑनलाइन किया जाएगा. जिला पंचायत राज अधिकारी अशोक कुमार सचान के मुताबिक, पिछले साल भी प्रदेश की 10 पंचायतों को उनके उल्लेखनीय काम के लिए यह विशेष सम्मान दिया गया था. इस बार भी अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली पंचायतों के बीच प्रतिस्पर्धा होगी. खास बात यह है कि एक ग्राम पंचायत केवल एक ही श्रेणी में अपना आवेदन भेज सकेगी.
पुरस्कार के लिए पंचायतों के काम का मूल्यांकन कई अलग-अलग क्षेत्रों में किया जाएगा. इनमें पंचायत सशक्तीकरण, घर-घर कचरा संग्रहण, अपनी आय के स्रोत तैयार करना और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए ज्यादा सेवाएं उपलब्ध कराना शामिल है. इसके अलावा ‘मेरा तालाब मेरी योजना’, आधार आधारित सेवाएं, तरल अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त पंचायत, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने जैसे काम भी चयन का आधार होंगे. महिला नेतृत्व और भागीदारी के साथ जैविक खेती में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को भी मौका मिलेगा.
आवेदन करने वाली पंचायतों को सबसे पहले बेसिक प्रश्नावली पूरी करनी होगी. इसमें कुल 20 अंक निर्धारित हैं और आगे बढ़ने के लिए कम से कम 60 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा. इसके बाद पंचायत को 80 अंकों वाली विशेष प्रश्नावली भरने का अवसर मिलेगा. यानी अंतिम चयन केवल आवेदन करने से नहीं होगा, बल्कि पंचायत के काम और उपलब्धियों का निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा. इस प्रक्रिया के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में वास्तव में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को आगे लाया जाएगा.
पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया कई स्तरों पर होगी. जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति आवेदनों की जांच करेगी. प्रत्येक श्रेणी में सबसे ज्यादा अंक पाने वाली अधिकतम पांच पंचायतों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद हर श्रेणी से एक पंचायत समेत अधिकतम 10 पंचायतों को मंडल स्तर पर भेजा जाएगा. मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति प्रत्येक श्रेणी में तीन पंचायतों का सत्यापन कर एक पंचायत का चयन करेगी. इसके बाद अधिकतम 10 पंचायतों की सूची राज्य स्तर पर जाएगी. यदि दो पंचायतों के अंक बराबर रहते हैं तो अधिक आबादी वाली पंचायत को प्राथमिकता दी जाएगी.