यूपी MLC चुनाव: पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीजेपी को झटका, सपा का दोनों सीटों पर दबदबा
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में समाजवादी पार्टी ने वाराणसी की शिक्षक सीट जीत ली है और स्नातक सीट पर भी उसी का उम्मीदवार आगे चल रहा है.
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में शानदार प्रदर्शन किया है. सपा ने वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट बरकरार रखी, जबकि वाराणसी स्नातक सीट पर भी उसके उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा की निर्णायक जीत की ओर बढ़ने की खबर है. वाराणसी में सपा की जीत ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज कर दी है.
शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत
वाराणसी शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद कुमार मिश्रा को 4,898 वोटों से हराया. वर्ष 2020 के चुनाव में मिश्रा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे और यादव से केवल 936 वोटों से हार गए थे.
जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने शिक्षकों के समर्थन का श्रेय सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के सकारात्मक दृष्टिकोण के कारण पार्टी पूरे प्रदेश में मजबूती से चुनाव लड़ सकी. यादव ने कहा कि जिस तरह मुलायम सिंह यादव को शिक्षक समुदाय का नेता माना जाता था, उसी तरह अखिलेश यादव भी शिक्षकों के प्रति वैसा ही नजरिया रखते हैं.
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यूजीसी विधेयक को लेकर क्या बोले यादव?
लाल बिहारी यादव ने कहा कि यूजीसी के विवादित विधेयक का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा. यह विधेयक विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव से निपटने के लिए नियमों से जुड़ा था और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है. यादव के मुताबिक, नौकरी की सुरक्षा चाहने वाले लोग उनके साथ रहे.
भाजपा ने भी कई सीटों पर दर्ज की जीत
11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा का कुल प्रदर्शन मजबूत रहा. पार्टी ने लखनऊ शिक्षक, मेरठ-सहारनपुर शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की. खबर के अनुसार, भाजपा ने कुल पांच सीटें जीतीं और एक अन्य सीट पर आगे रही. इसके बावजूद वाराणसी में हार पार्टी के लिए राजनीतिक झटका मानी जा रही है.
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र क्या होते हैं?
विधान परिषद वाले राज्यों में कुछ सीटें शिक्षकों और स्नातकों के लिए निर्धारित होती हैं. इन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल पात्र और पंजीकृत शिक्षक या स्नातक मतदाता ही मतदान कर सकते हैं. आम जनता इन सीटों के चुनाव में सीधे वोट नहीं डालती. इन सीटों के लिए वरीयता आधारित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल होता है.
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मायने
सपा नेताओं ने वाराणसी के नतीजों को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अहम संकेत बताया. उनका कहना है कि भाजपा के मजबूत क्षेत्र में सपा का प्रदर्शन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव दिखाता है. हालांकि, विधान परिषद चुनाव के नतीजों को पूरे प्रदेश के मतदाताओं के रुझान का सीधा प्रमाण नहीं माना जा सकता.