'नेता बनना है तो नौकरी छोड़िए', बिजली कटौती पर भड़के मंत्री; अधिकारी को लगाई फटकार

मुजफ्फरनगर में बिजली कटौती और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे को लेकर विवाद गहरा गया है. समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने बिजली विभाग के चीफ को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई, जिससे मामला चर्चा में आ गया.

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Kanhaiya Kumar Jha

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बिजली व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है. बिजली कटौती से परेशान लोगों की शिकायतों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इसी मुद्दे पर आयोजित एक समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विद्युत विभाग के अधिकारियों के कामकाज और व्यवहार पर नाराजगी जताई. बैठक के दौरान हुई तीखी टिप्पणी और प्रतिक्रिया ने पूरे घटनाक्रम को सुर्खियों में ला दिया है.

मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं की समस्याओं पर चर्चा की गई. इस दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जनता और जनप्रतिनिधियों से बातचीत करते समय अधिकारियों को संयमित और जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए. बैठक का माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब मंत्री ने बिजली विभाग के चीफ विनोद कुमार को सख्त शब्दों में फटकार लगाई.

मंत्री की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों की भाषा और व्यवहार को लेकर नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को राजनीति में आने का शौक है तो वह नौकरी छोड़कर खुलकर मैदान में आ सकता है. मंत्री की यह टिप्पणी बैठक में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. बताया गया कि इस दौरान विभाग के चीफ नाराज होकर बैठक छोड़ने के लिए उठ खड़े हुए थे.


विवाद की शुरुआत कैसे हुई

इस पूरे विवाद की जड़ दो दिन पहले की घटनाओं में बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार बिजलीघर में हुए प्रदर्शन के बाद कुछ लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया था. मंत्री ने पहले ही अधिकारियों को ऐसे मामलों में संयम बरतने और मुकदमा दर्ज न करने की सलाह दी थी. इसके बावजूद कार्रवाई होने से राजनीतिक असंतोष बढ़ गया और मामला सार्वजनिक विवाद में बदल गया.

कार्यालय पर हुआ विरोध प्रदर्शन

मुकदमा दर्ज होने की खबर के बाद राष्ट्रीय लोक दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विभागीय कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के फैसले पर सवाल उठाए और कार्रवाई वापस लेने की मांग की. इस विरोध के बाद प्रशासन और विभाग दोनों पर दबाव बढ़ गया. मामला स्थानीय राजनीति में भी प्रमुख मुद्दा बन गया.

जनता की परेशानी पर मंत्री का जोर

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने कहा कि गर्मी के मौसम में तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं, लेकिन जनता की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से लोगों को पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं की दिक्कत झेलनी पड़ती है. अधिकारियों को संवेदनशीलता और मर्यादा के साथ जनता की शिकायतों का समाधान करना चाहिए.