बाघ से आगे बढ़ा यूपी का वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, अब सारस, तितली और प्रवासी पक्षी भी होंगे आकर्षण
उत्तर प्रदेश में बाघों के अलावा सारस, तितलियों और प्रवासी पक्षियों को केंद्र में रखकर 231 करोड़ की 70 इको टूरिज्म परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा.
उत्तर प्रदेश का पर्यटन अब धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं है. राज्य सरकार जंगलों, नदियों और वेटलैंड्स को विकसित कर इको-टूरिज्म मॉडल को बढ़ावा दे रही है. इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक सुंदरता के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को मजबूती देना है.
231 करोड़ की 70 परियोजनाएं
वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के दौरान 70 इको-टूरिज्म परियोजनाओं के लिए 231 करोड़ रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए हैं. पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, इनका लक्ष्य पर्यटकों को जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) के प्रति जागरूक करना और स्थानीय समुदायों को आय के अवसर प्रदान करना है.
दुधवा से बुंदेलखंड तक विकास
दुधवा टाइगर रिजर्व और आसपास के वन्यजीव क्षेत्रों में रास्तों व दिशा-निर्देशों की स्पष्टता के लिए 8 करोड़ रुपये की लागत से साइनेज लगाए जा रहे हैं. वहीं, चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व में 14 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है.
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प्रवासी पक्षियों के लिए खास वेटलैंड्स
मुजफ्फरनगर के हैदरपुर, आगरा के सूर सरोवर और महराजगंज के सोहगीबरवा जैसे वेटलैंड्स में वॉचटावर और नेचर ट्रेल विकसित किए जा रहे हैं. सर्दियों में ग्रेलैग गूज और नॉर्दर्न पिंटेल जैसे विदेशी पक्षियों का आगमन इन स्थलों को बर्ड वॉचिंग का प्रमुख केंद्र बना रहा है.
सारस सर्किट और कामाख्या पार्क
इटावा और मैनपुरी में 7 करोड़ रुपये से दो सारस सर्किट बनाए जा रहे हैं, जहां पर्यटक राजकीय पक्षी सारस के प्राकृतिक आवास को समझ सकेंगे. इसके अलावा गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क में तितली उद्यान और इंटरप्रिटेशन सेंटर विकसित किया जा रहा है.