यूपी शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन, 465 स्कूलों की मान्यता रद्द; लिस्ट में कहीं आपका जिला भी तो नहीं?
यूपी बोर्ड ने प्रदेश के 70 जिलों में स्थित 465 स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी है. बोर्ड के अनुसार इन संस्थानों से लगातार दो शैक्षिक सत्रों में कोई भी छात्र हाईस्कूल या इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल नहीं हुआ.
उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. यूपी बोर्ड ने ऐसे सैकड़ों स्कूलों पर कार्रवाई की है, जहां लंबे समय से शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रही थीं. इस निर्णय के बाद कई जिलों में स्कूल प्रबंधन के बीच चर्चा तेज हो गई है. बोर्ड द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों के कुल 465 स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है. जांच में पाया गया कि इन विद्यालयों से लगातार दो शैक्षिक सत्रों में कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हुआ. नियमों के आधार पर यह कार्रवाई लागू की गई है.
रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि संबंधित विद्यालयों के शैक्षणिक रिकॉर्ड की समीक्षा की गई थी. समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कई स्कूलों से लगातार दो वर्षों तक हाईस्कूल या इंटरमीडिएट परीक्षा में कोई परीक्षार्थी शामिल नहीं हुआ. इसके बाद नियमानुसार उनकी मान्यता समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई. इस कार्रवाई में प्रदेश के 70 जिलों के विद्यालय शामिल हैं.
प्रयागराज के 25 स्कूल भी लिस्ट में
मान्यता रद्द किए गए संस्थानों में प्रयागराज जिले के 25 विद्यालय भी शामिल हैं. बोर्ड का कहना है कि जिन स्कूलों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां नहीं चल रहीं और परीक्षा में छात्रों की भागीदारी शून्य है, उनके संबंध में नियम पहले से स्पष्ट हैं. ऐसे मामलों में अलग से किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती. निर्धारित प्रावधानों के तहत कार्रवाई स्वतः प्रभावी हो जाती है.
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शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
बोर्ड लंबे समय से ऐसे संस्थानों पर नजर बनाए हुए था, जिनके पास मान्यता तो है लेकिन वहां पढ़ाई या विद्यार्थियों की उपस्थिति नगण्य है. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के विद्यालय शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता पर असर डालते हैं. इसी वजह से निष्क्रिय संस्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. इससे वास्तविक रूप से संचालित स्कूलों को बेहतर माहौल मिलने की उम्मीद है.
कुछ श्रेणियों को दी गई छूट
बोर्ड के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रावधान इंटर वन टाइम, अतिरिक्त वर्ग या मान्य वैकल्पिक विषयों वाली मान्यता पर लागू नहीं होगा. ऐसे संस्थानों में किसी विशेष विषय के विद्यार्थियों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन अन्य विषयों में परीक्षार्थी मौजूद रहते हैं. इसलिए उनकी मान्यता इस आदेश से प्रभावित नहीं होगी. बोर्ड का मानना है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी.