उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. साल 2026-27 में समग्र शिक्षा योजना के तहत 2243 प्राथमिक और 883 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पुराने भवनों का पुनर्निर्माण किया जाएगा. इन विद्यालयों के लिए सरकार ने बजट स्वीकृत कर दिया है और आधी राशि जिलों को जारी भी हो चुकी है. जर्जर भवनों को हटाकर उसी परिसर में नए भवन बनाए जाएंगे, जिससे बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल सुरक्षित और बेहतर हो सकेगा.
पुनर्निर्माण के लिए प्रदेश के कुल 3126 विद्यालय चुने गए हैं. इनमें 2243 प्राथमिक और 883 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं. प्राथमिक विद्यालय के एक भवन पर 15.36 लाख रुपये, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालय पर 29.44 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. शिक्षा मंत्रालय के परियोजना अनुमोदन बोर्ड ने इस योजना को मंजूरी दी है. इसके बाद समग्र शिक्षा परियोजना कार्यालय ने जिलों में निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश जारी किए हैं.
सरकार ने स्वीकृत बजट की 50 प्रतिशत राशि संबंधित जिलों को उपलब्ध करा दी है. प्राथमिक विद्यालयों के लिए 172.26 करोड़ रुपये और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए 129.97 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. अब जिला स्तर पर विद्यालयों की स्थिति के अनुसार निर्माण कार्य की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. विभाग ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश भी भेज दिए हैं.
जिन स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं या जिन्हें गिराना जरूरी है, उन्हें उसी परिसर में ध्वस्त किया जाएगा. इसके बाद निर्धारित डिजाइन के अनुसार नया भवन तैयार होगा. विभाग की ओर से भवन का प्रारूप भी जारी कर दिया गया है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य पुराने और असुरक्षित ढांचों की जगह ऐसे भवन तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त और सुरक्षित स्थान मिल सके.
नए भवन तैयार होने के बाद विद्यार्थियों को सुरक्षित कक्ष उपलब्ध होंगे और विद्यालयों का वातावरण भी बेहतर होने की उम्मीद है. जर्जर इमारतों के कारण पढ़ाई पर पड़ने वाले असर को कम करने में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार की योजना के तहत निर्माण पूरा होने पर इन विद्यालयों में बच्चों को सुविधाजनक स्थान मिलेगा, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए पढ़ाई का माहौल अधिक अनुकूल बनाया जा सकेगा.