नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में सोमवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने शंकराचार्य के कथित अपमान और यूजीसी एक्ट के खिलाफ नाराजगी जताई थी. इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा.
अलंकार अग्निहोत्री ने न सिर्फ इस्तीफा दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर सरकार और भाजपा के खिलाफ खुले तौर पर पोस्ट भी साझा किए. इसके बाद उनके कदमों को सरकारी सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन के तौर पर देखा गया. शासन स्तर पर तेजी से मंथन हुआ और आखिरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला लिया गया, जिससे पूरा प्रशासनिक तंत्र सतर्क हो गया.
शासन ने अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जिलाधिकारी कार्यालय, शामली से अटैच किया गया है. सरकार ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बरेली के मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है. निलंबन के आदेश उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली के नियम 4 के तहत जारी किए गए हैं.
अलंकार के इस्तीफे के बाद उनके आवास पर ब्राह्मणवादी संगठनों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों का जमावड़ा लग गया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए और भाजपा के बॉयकॉट का आह्वान तक कर दिया. इन सभी घटनाओं की रिपोर्ट जिलाधिकारी बरेली ने उसी रात शासन को भेज दी थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई.
विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग ने राज्यपाल के आदेश का हवाला देते हुए निलंबन का पत्र जारी किया. इसमें कहा गया है कि अलंकार अग्निहोत्री प्रथम दृष्टया अनुशासनहीनता और सेवा शर्तों के उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं. उनके खिलाफ अलग से विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई का आरोप पत्र भी जारी किया जाएगा, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया तय होगी.
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे के पीछे दो प्रमुख कारण गिनाए थे. पहला प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी और प्रशासन की भूमिका पर आपत्ति. दूसरा यूजीसी के हालिया दिशा-निर्देशों को उन्होंने काला कानून बताते हुए ब्राह्मण समाज के खिलाफ बताया था.
इस्तीफे के साथ ही अलंकार ने सोशल मीडिया पर बॉयकॉट भाजपा और काला कानून वापस लो जैसे नारे लिखे पोस्टर के साथ अपनी तस्वीर साझा की थी. प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी कार्यरत अधिकारी द्वारा राजनीतिक दल के खिलाफ इस तरह का प्रचार करना आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है. यही वजह रही कि शासन ने बिना देरी किए निलंबन का फैसला लिया.
गणतंत्र दिवस के आसपास एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी के इस कदम ने शासन को असहज कर दिया है. निलंबन और विभागीय जांच के बाद अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. जांच रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में उनकी सेवा समाप्ति या अन्य कठोर दंड पर भी निर्णय लिया जा सकता है. इस पूरे घटनाक्रम से प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मचा हुआ है.