महंत नरेंद्र गिरि मौत मामला, 2021 से जेल में बंद आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत
महंत नरेंद्र गिरि का शव 20 सितंबर 2021 को प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में फंदे से लटका मिला था. इस घटना से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी, क्योंकि महंत नरेंद्र गिरि संत समाज की एक बड़ी और प्रभावशाली हस्ती थे.
सुप्रीम कोर्ट ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत से जुड़े चर्चित मामले में एक आरोपी को जमानत दे दी है. अदालत ने कहा कि इस मामले का ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है, इसलिए आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना जरूरी नहीं है.
कौन हैं आरोपी?
इस मामले में आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी हैं, जो महंत नरेंद्र गिरि के करीबी माने जाते थे. वह सितंबर 2021 से जेल में बंद थे. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जमानत देने से इनकार किया गया था.
महंत नरेंद्र गिरि की मौत का मामला
महंत नरेंद्र गिरि का शव 20 सितंबर 2021 को प्रयागराज स्थित बाघंबरी मठ में फंदे से लटका मिला था. उनके शिष्यों ने सबसे पहले यह दृश्य देखा था. इस घटना से पूरे देश में सनसनी फैल गई थी, क्योंकि महंत नरेंद्र गिरि संत समाज की एक बड़ी और प्रभावशाली हस्ती थे.
सीबीआई जांच में क्या सामने आया
इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने नवंबर 2021 में दाखिल चार्जशीट में कहा था कि महंत नरेंद्र गिरि मानसिक तनाव में थे. जांच एजेंसी के अनुसार, आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और तिवारी के बेटे संदीप तिवारी के व्यवहार से महंत इतने परेशान थे कि उन्हें समाज में बदनामी का डर सताने लगा और इसी कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया.
अदालत ने जमानत क्यों दी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि सीबीआई ने करीब 150 गवाहों की सूची दी है, लेकिन अब तक सिर्फ तीन गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं. इससे साफ है कि मुकदमा जल्द खत्म होने वाला नहीं है. अदालत ने यह भी माना कि आद्या प्रसाद तिवारी इस मामले के मुख्य आरोपी नहीं हैं.
जमानत की शर्तें
अदालत ने आरोपी को सख्त चेतावनी दी है कि वह किसी भी गवाह को धमकाने, बहकाने या प्रभावित करने की कोशिश न करें. साथ ही, उन्हें हर सुनवाई में अदालत के सामने पेश होना होगा. अगर जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ, तो ट्रायल कोर्ट को जमानत रद्द करने का अधिकार होगा.
मामले की संवेदनशीलता
यह मामला आज भी संत समाज और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का अहम कदम माना जा रहा है, जबकि मामले की अंतिम सच्चाई अब ट्रायल पूरा होने के बाद ही सामने आ सकेगी.