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श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही ईदगाह विवाद: हाई कोर्ट में आज अहम सुनवाई, वाद बिंदु तय होने की उम्मीद

मथुरा के बहुचर्चित श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामलों में शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है. यह सुनवाई न्यायालय संख्या 79 में जस्टिस अवनीश सक्सेना की अदालत में हो रही है.

India Daily
Shilpa Srivastava

मथुरा: यूपी के मथुरा के बहुचर्चित श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह विवाद से जुड़े मामलों में शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है. यह सुनवाई न्यायालय संख्या 79 में जस्टिस अवनीश सक्सेना की अदालत में अदालत में हो रही है. इस दौरान कोर्ट विभिन्न प्रार्थना पत्रों के निस्तारण, संशोधन प्रार्थना पत्रों पर दाखिल जवाब और वाद बिंदु तय करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर सुनवाई करेगा.

मामले से जुड़े पक्षकारों के अनुसार, इस सुनवाई में अदालत यह भी तय कर सकती है कि किन मुद्दों पर आगे सुनवाई की जाएगी. पिछली सुनवाई 28 मार्च को हुई थी, लेकिन उस समय संशोधन प्रार्थना पत्रों पर जवाब दाखिल न होने के कारण सुनवाई टाल दी गई थी. अब सभी पक्षों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने-अपने जवाब अदालत में प्रस्तुत करें, जिससे सुनवाई आगे बढ़ सके.

मामले में अहम पहलू आया सामने:

वहीं, इस मामले से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आगरा स्थित जामा मस्जिद आगरा से भी सामने आया है. पक्षकार एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह का दावा है कि मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा दबी हुई है. इस संबंध में अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से जवाब मांगा था, जिसे आज की सुनवाई में दाखिल किया जा सकता है.

एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह का यह भी कहना है कि वर्ष 1670 में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त कराया था और उस समय भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह को आगरा ले जाया गया. हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और कोर्ट में इस पर सुनवाई जारी है.

अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 13 अप्रैल को:

इसके अलावा, इस मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में भी प्रस्तावित है. फिलहाल सभी की नजरें आज की हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें मामले की दिशा तय हो सकती है. एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह का आरोप है कि शाही ईदगाह पक्ष इस मामले का निस्तारण नहीं होने देना चाहता जिसकी बजह से वह बार बार सुनवाई को टालने का प्रयास करते रहते हैं.