2.86 करोड़ घरों में पहुंची बिजली, UP ने सबसे ज्यादा कनेक्शन देकर बनाया रिकॉर्ड

सौभाग्य योजना ने देश के करोड़ों बिजली विहीन घरों तक कनेक्शन पहुंचाया. 2022 में योजना बंद होने तक 2.86 करोड़ से ज्यादा परिवार जुड़े, जबकि उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा.

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Meenu Singh

देश में बिजली की पहुंच बढ़ाने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य ने ग्रामीण और वंचित परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव किया. 25 सितंबर 2017 को शुरू हुई इस योजना का मकसद उन घरों तक बिजली पहुंचाना था, जहां कनेक्शन नहीं था. शुरुआत में इसे दिसंबर 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में मार्च 2019 तक बढ़ाया गया. योजना के तहत करोड़ों परिवारों को बिजली कनेक्शन मिला.

2017 में शुरू हुई थी सौभाग्य योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2017 को सौभाग्य योजना की घोषणा की थी. इसके लिए केंद्र ने 16,320 करोड़ रुपये का बजट तय किया. योजना में 2011 की सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आधार पर गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने का प्रावधान था. अन्य परिवारों को 500 रुपये में कनेक्शन दिया जाना था, जिसकी रकम किस्तों में चुकाने की सुविधा थी.

कनेक्शन के साथ मिली ये सुविधाएं

सौभाग्य योजना में सिर्फ बिजली का कनेक्शन देना ही शामिल नहीं था. घर तक नजदीकी बिजली पोल से सर्विस केबल पहुंचाई जाती थी. इसके साथ एनर्जी मीटर, एलईडी बल्ब, एक लाइट प्वाइंट की वायरिंग और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट भी दिया जाता था. सरकार का उद्देश्य बिजली के अंतिम छोर तक पहुंच की समस्या को दूर करना था, ताकि बिजली विहीन घरों को सीधे नेटवर्क से जोड़ा जा सके.


मार्च 2022 तक 2.86 करोड़ घर जुड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 तक उस समय तक चिन्हित सभी इच्छुक बिजली विहीन परिवारों को कनेक्शन दिया जा चुका था. इसके बाद असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मणिपुर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में करीब 18-19 लाख ऐसे परिवारों को भी जोड़ा गया, जिन्होंने पहले कनेक्शन लेने से मना किया था. 31 मार्च 2022 को योजना औपचारिक रूप से बंद हुई. तब तक 2.86 करोड़ से ज्यादा परिवार बिजली से जुड़ चुके थे.

उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा

सौभाग्य योजना के तहत उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली कनेक्शन दिए गए. राज्य में 91.8 लाख से अधिक घरों को बिजली से जोड़ा गया. यह संख्या बिहार के 32.6 लाख, ओडिशा के 24.5 लाख और असम के 23.3 लाख कनेक्शनों से काफी ज्यादा थी. योजना शुरू होने के समय उत्तर प्रदेश में देश के सबसे ज्यादा बिजली विहीन परिवार थे. ऐसे में राज्य का आंकड़ा चुनौती के बड़े पैमाने और तेजी से हुए काम को दिखाता है.