ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब की आड़ में चल रहा था लूट का खेल, नोएडा पुलिस ने पांच आरोपियों को दबोचा
नोएडा पुलिस ने ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब के नाम पर लोगों को दोस्ती के जाल में फंसाकर सुनसान जगहों पर लूटपाट करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को अभिरक्षा में लिया गया है.
नोएडा में ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब के नाम पर लोगों को जाल में फंसाकर लूटपाट करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है. थाना सेक्टर-24 पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को अभिरक्षा में लिया गया है.
आरोपियों के कब्जे से लूटी गई फॉर्च्यूनर कार, वारदात में इस्तेमाल की गई दो कारें और एक चाकू बरामद किया गया है. पुलिस अब गिरोह के आपराधिक इतिहास और अन्य मामलों में उनकी संलिप्तता की जांच कर रही है.
खेलगांव पार्क के पास हुई कार्रवाई
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गिरोह के सदस्य सेक्टर-54 स्थित खेलगांव पार्क के आसपास मौजूद हैं. सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर सभी आरोपियों को पकड़ लिया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फिरोजाबाद निवासी ओमवीर यादव, मैनपुरी निवासी मंजेश यादव, औरैया निवासी निधि यादव, फिरोजाबाद निवासी प्रियंका यादव तथा मैनपुरी निवासी काजल उर्फ रिया यादव के रूप में हुई है. इनके साथ एक नाबालिग भी शामिल था, जिसे नियमानुसार अभिरक्षा में लिया गया है.
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फर्जी फ्रेंडशिप क्लब बनाकर करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने ऑनलाइन एक फर्जी फ्रेंडशिप क्लब बना रखा था. यह गिरोह इंटरनेट और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लोगों के मोबाइल नंबर जुटाता था. इसके बाद उनसे दोस्ती की जाती और धीरे-धीरे उनका विश्वास जीत लिया जाता था. जब सामने वाला व्यक्ति मिलने के लिए तैयार हो जाता, तब उसे दिल्ली, नोएडा या एनसीआर के किसी सुनसान इलाके में बुलाया जाता. पूरी वारदात पहले से तय योजना के अनुसार अंजाम दी जाती थी ताकि किसी को शक न हो.
सुनसान जगह पर ले जाकर लूटपाट
पुलिस के अनुसार गिरोह वारदात के दौरान दो अलग-अलग कारों का इस्तेमाल करता था. पहली कार में महिला सदस्य और उसके साथ दो या तीन साथी मौजूद रहते थे. महिला बातचीत और मुलाकात के बहाने पीड़ित को अपनी कार में बैठाकर सुनसान स्थान तक ले जाती थी. इसी दौरान दूसरी कार कुछ दूरी पर खड़ी रहती थी, जिसमें गिरोह के अन्य सदस्य निगरानी करते थे. जैसे ही पीड़ित पूरी तरह उनके कब्जे में आ जाता उसे लूट लेते थे. पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घटना को अंजाम देने के बाद दोनों कारें अलग-अलग दिशाओं में निकल जाती थीं. इससे पुलिस के लिए उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता था.