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राम मंदिर और गोरखनाथ मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी, आधी रात को आए एक कॉल से मचा हड़कंप

गोरखपुर के डीआईजी को आधी रात मिली एक धमकी भरी कॉल से पुलिस महकमे में हलचल मच गई. जांच में पता चला कि कॉल करने वाला कुशीनगर का एक मानसिक रूप से अस्वस्थ किशोर था.

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Kuldeep Sharma

उत्तर प्रदेश में सोमवार देर रात एक फोन कॉल ने पुलिस प्रशासन को तुरंत सतर्क कर दिया. गोरखपुर के डीआईजी को आए इस कॉल में अयोध्या के राम मंदिर और गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी. सूचना मिलते ही पुलिस और विशेष टीमों ने कॉल की जांच शुरू कर दी. तकनीकी सहायता से कॉल करने वाले तक पहुंचा गया. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने मामले को एक अलग दिशा दे दी और पुलिस ने आगे की कार्रवाई उसी आधार पर की.

आधी रात की कॉल से बढ़ी सतर्कता

सूत्रों के अनुसार, सोमवार देर रात गोरखपुर के डीआईजी के फोन पर एक युवक ने संपर्क किया और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी. मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस ने इसे बेहद गंभीरता से लिया. सूचना मिलते ही संबंधित इकाइयों को सक्रिय किया गया और कॉल की लोकेशन तथा अन्य तकनीकी विवरण जुटाने का काम शुरू हुआ. सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए त्वरित कार्रवाई की. शुरुआती जांच में पुलिस का पूरा ध्यान कॉल करने वाले की पहचान और उसके इरादों को समझने पर केंद्रित रहा.

लोकेशन ट्रेस कर पहुंची पुलिस

तकनीकी जांच के बाद पुलिस को पता चला कि कॉल कुशीनगर जिले के पटहेरवा थाना क्षेत्र के बलुआ तकिया गांव से की गई थी. इसके बाद स्थानीय पुलिस और अन्य टीमों ने मौके पर पहुंचकर संबंधित युवक को अपने कब्जे में लिया. पूछताछ के दौरान उसकी गतिविधियों और पारिवारिक स्थिति की जानकारी जुटाई गई. पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की भी जांच की. अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि धमकी के पीछे कोई संगठित साजिश या अन्य व्यक्ति शामिल तो नहीं है. जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए.


मानसिक स्थिति ने बदला मामला

पुलिस की पूछताछ और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पता चला कि युवक की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है. बताया गया कि वह अपनी दादी के साथ रहता है और पहले भी इस तरह की हरकतें कर चुका है. ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने भी पुलिस को उसकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के बारे में जानकारी दी. अधिकारियों ने उसकी पृष्ठभूमि और पुराने रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें इसी प्रकार की घटनाओं का उल्लेख मिला. इसके बाद मामले को संवेदनशीलता के साथ संभाला गया.

जांच के बाद परिवार को सौंपा गया युवक

पूरी पड़ताल के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि धमकी के पीछे किसी तरह की वास्तविक साजिश या आतंकी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं. युवक की मानसिक स्थिति को देखते हुए उससे आवश्यक पूछताछ की गई और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे उसकी दादी की निगरानी में सौंप दिया गया. हालांकि पुलिस ने परिवार को सावधानी बरतने और युवक की गतिविधियों पर नजर रखने की सलाह दी है. घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सुरक्षा से जुड़े हर इनपुट को गंभीरता से लेना कितना आवश्यक है.