राम मंदिर ट्रस्ट ने बताई CEO की असली शर्त, कॉर्पोरेट अनुभव से ज्यादा जरूरी होगी ये योग्यता
राम मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति के लिए बनाई गई सर्च कमेटी ने चयन प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है. समिति का कहना है कि इस पद के लिए सिर्फ डिग्री या कॉर्पोरेट अनुभव नहीं, बल्कि भगवान राम के प्रति श्रद्धा, सेवा भाव और पारदर्शी प्रशासन सबसे महत्वपूर्ण होंगे.
अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर उठे विवाद के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. इसी क्रम में ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस अहम पद के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने साफ कर दिया है कि उम्मीदवार का चयन केवल शैक्षणिक योग्यता या बड़े पदों पर काम करने के अनुभव के आधार पर नहीं होगा. समिति के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण गुण भगवान राम के प्रति गहरी श्रद्धा और सेवा की भावना होगी.
सर्च कमेटी ने बताई सबसे बड़ी शर्त
सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने कहा कि राम मंदिर जैसा संस्थान केवल पेशेवर सोच से नहीं चलाया जा सकता. उनके अनुसार एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो भगवान राम के प्रति आस्था रखता हो और श्रद्धालुओं की सेवा को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी माने. उन्होंने कहा कि पेशेवर क्षमता जरूरी है, लेकिन उससे पहले भक्ति, समाज सेवा का भाव और भक्तों के प्रति सम्मान होना चाहिए. यही गुण किसी व्यक्ति को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के योग्य बनाते हैं.
CEO होगा मंदिर प्रबंधन की सबसे अहम कड़ी
समिति का मानना है कि नया CEO मंदिर की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ साबित होगा. उसके जिम्मे श्रद्धालुओं की सुविधाओं का प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक का उपयोग और मंदिर के विकास से जुड़े कई बड़े फैसले होंगे. राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, व्यवस्था और सुविधाओं को बेहतर बनाना CEO की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगा.
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कौन हैं सर्च कमेटी के सदस्य?
राम मंदिर ट्रस्ट ने 6 जुलाई को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था. समिति में सुरेश हावरे, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं. सुरेश हावरे लंबे समय तक परमाणु ऊर्जा विभाग में कार्य कर चुके हैं. वह शिर्डी साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के प्रमुख भी रह चुके हैं और वर्तमान में कई महत्वपूर्ण संस्थानों से जुड़े हुए हैं. मंदिर प्रबंधन के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें इस समिति में शामिल किया गया है.
सुरेश हावरे का कहना है कि अयोध्या का राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और पांच सौ वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है. यही कारण है कि यहां की प्रशासनिक व्यवस्था भी सामान्य संस्थानों से अलग और अधिक जिम्मेदारी वाली है. उन्होंने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है. ऐसे में आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है.