वृंदावन में जाम के खिलाफ फूटा जनाक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल; हाईकोर्ट जाने की तैयारी
वक्ताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इसके समाधान के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।
धर्मनगरी वृंदावन में लगातार विकराल होती जा रही जाम की समस्या अब जनआक्रोश का रूप ले चुकी है। लंबे समय से इस समस्या से जूझ रहे स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के तत्वावधान में गणेशीलाल अतिथि भवन, दाऊजी की बगीची में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें नगर के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वृंदावन देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। अव्यवस्थित ट्रैफिक और प्रशासनिक लापरवाही के चलते आए दिन भीषण जाम की स्थिति बन रही है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वक्ताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन इसके समाधान के लिए अब तक कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। शहर में ई-रिक्शाओं की अनियंत्रित संख्या और बाहरी वाहनों की बेधड़क आवाजाही को जाम का प्रमुख कारण बताया गया। उनका कहना था कि बिना किसी ठोस ट्रैफिक प्लान के शहर की व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे चल रही है।
बैठक में मांग की गई कि ई-रिक्शाओं के संचालन पर तत्काल नियंत्रण किया जाए और उनके लिए निर्धारित रूट तय किए जाएं। साथ ही बाहरी वाहनों के प्रवेश को सीमित करने, शहर में व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था करने और वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता बढ़ाए बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है।
जाम की समस्या का असर स्थानीय व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। व्यापारियों ने बताया कि ग्राहकों को बाजार तक पहुंचने में भारी कठिनाई हो रही है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। वहीं कई बार एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी जाम में फंस जाती हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
बैठक के दौरान प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो नगरवासी बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। सभी संगठनों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर संघर्ष करने का संकल्प भी लिया।
अंत में निर्णय लिया गया कि एक समिति का गठन किया जाएगा, जो प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर समस्या के समाधान के लिए प्रयास करेगी। इसके साथ ही स्थानीय लोगों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो इस मामले को उच्च स्तर पर ले जाया जाएगा।
बैठक में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि जैसे वीआईपी के आगमन पर प्रशासन कुछ समय के लिए जाम की समस्या को नियंत्रित कर लेता है, तो स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा सकता। इसी को लेकर अब स्थानीय लोग हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में हैं, ताकि वृंदावन को इस गंभीर समस्या से स्थायी राहत मिल सके।