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प्रयागराज में फर्जी वकीलों पर बड़ा शिकंजा, 100 के खिलाफ FIR; जांच में सामने आई चौंकाने वाली डिग्रियां

प्रयागराज में फर्जी शैक्षणिक डिग्री के आधार पर वकालत करने के आरोप में 100 अधिवक्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं. डिग्री सत्यापन की कार्रवाई अभी जारी है और आगे और मामले सामने आ सकते हैं.

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Meenu Singh

प्रयागराज में कथित फर्जी वकीलों के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद अधिवक्ताओं की शैक्षणिक योग्यताओं की जांच की जा रही है. इसी प्रक्रिया में अब तक 100 वकीलों के खिलाफ अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी हैं. सभी मामले सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुए हैं. सत्यापन के दौरान जिन डिग्रियों को फर्जी पाया गया, उनके आधार पर संबंधित अधिवक्ताओं पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है.

100 वकीलों पर दर्ज हुई FIR

बार काउंसिल के सचिव आरके शुक्ला की ओर से 8 अगस्त से अब तक 100 अलग-अलग अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. ये सभी मामले प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुए हैं. बताया गया है कि मुकदमों के अपराध संख्या 291 से 404 तक हैं. जांच में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र पाए जाने के बाद संबंधित वकीलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है.

कई जिलों के अधिवक्ता जांच के घेरे में

इस कार्रवाई की जद में उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अधिवक्ता आए हैं. इनमें सहारनपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, मथुरा, प्रतापगढ़, गोरखपुर, कानपुर, नोएडा, हरदोई, झांसी, फतेहपुर, हाथरस और आगरा शामिल हैं. इसके अलावा शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बलिया, भदोही, मिर्जापुर, कौशांबी और मुजफ्फरनगर के नाम भी सामने आए हैं. इनमें एक पीपी के रूप में काम करने वाले अधिवक्ता भी शामिल बताए जा रहे हैं.


इलाहाबाद के सबसे ज्यादा मामले

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक 45 प्राथमिकी इलाहाबाद के कथित फर्जी डिग्रीधारी वकीलों के खिलाफ दर्ज हुई हैं. बार काउंसिल की ओर से डिग्रियों की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. इसलिए आने वाले समय में और अधिवक्ताओं पर कार्रवाई हो सकती है. सत्यापन का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे कोई व्यक्ति न्यायिक व्यवस्था में वकालत तो नहीं कर रहा.

हाई कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी जांच

अधिवक्ताओं की शैक्षणिक डिग्रियों का सत्यापन इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ है. जांच में संदिग्ध प्रमाणपत्र सामने आने पर बार काउंसिल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का रास्ता अपनाया. इस कार्रवाई को न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है. अब निगाहें आगे होने वाले सत्यापन पर हैं, क्योंकि जांच पूरी होने के बाद फर्जी डिग्री से जुड़े और मामले सामने आने की संभावना है.