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सैलरी से कई गुना ज्यादा थी EMI, 1.40 करोड़ के कर्ज में फंसे डॉक्टर ने दे दी जान

गोरखपुर में पशु चिकित्सक डॉक्टर परमात्मा की खुदकुशी के बाद लोन जालसाजी का मामला सामने आया है. परिवार का आरोप है कि लोन माफ कराने के नाम पर डॉक्टर से करीब 1.40 करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर कराई गई और उनकी सैलरी से कई गुना ज्यादा EMI का बोझ डाल दिया गया.

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Babli Rautela

गोरखपुर के राजेंद्र नगर स्थित वसंत इनक्लेव अपार्टमेंट में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब पशु चिकित्सक डॉक्टर परमात्मा ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. पुलिस को डॉक्टर की जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला. इसमें गरिमा सिंह पुत्री ध्रुव नारायण सिंह को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया गया है. पुलिस ने सुसाइड नोट को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है. साथ ही परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं.

परिवार ने लगाया करोड़ों की जालसाजी का आरोप

डॉक्टर परमात्मा के परिवार ने गरिमा सिंह और उससे जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. डॉक्टर की पत्नी का आरोप है कि गरिमा सिंह ने लोन माफ कराने का भरोसा देकर उनके पति से अलग अलग बैंकों से लोन करवाया. आरोप है कि लोन की रकम डॉक्टर से ट्रांसफर कराई गई और करीब 1.40 करोड़ रुपये हड़प लिए गए. परिवार का कहना है कि गरिमा ने खुद लोन की EMI जमा करने की बात कही थी, लेकिन बाद में किस्तों का भुगतान नहीं किया गया. जब बैंक की ओर से EMI को लेकर लगातार दबाव आने लगा तो डॉक्टर की आर्थिक स्थिति और ज्यादा खराब होती चली गई.

सैलरी से कई गुना ज्यादा हो गई थी EMI

परिवार के मुताबिक डॉक्टर परमात्मा पर लोन की किस्तों का इतना बड़ा बोझ हो गया था कि उनकी मासिक EMI उनकी सैलरी से भी कई गुना अधिक हो गई थी. बैंकों का दबाव, कर्ज और कथित जालसाजी के कारण डॉक्टर काफी परेशान थे. परिवार का आरोप है कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण वह मानसिक रूप से भी परेशान रहने लगे थे. हालांकि पुलिस अभी इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है. जांच के बाद ही यह साफ होगा कि डॉक्टर के नाम पर कितने लोन लिए गए और रकम का वास्तविक लेनदेन किस तरह हुआ.


डॉक्टर की जेब से मिले सुसाइड नोट में गरिमा सिंह का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है. परिवार के आरोपों और सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने गरिमा सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और जालसाजी से जुड़े आरोपों में केस दर्ज किया है. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि डॉक्टर और आरोपियों के बीच कब से संपर्क था, किस माध्यम से बातचीत होती थी और लोन से जुड़ा पूरा लेनदेन किस तरह किया गया.