लखनऊ में बना देश का अनोखा ‘प्रकृति ज्ञान धाम’, QR कोड से मिलेगी पेड़ों की पूरी कहानी
लखनऊ में CSIR-NBRI ने ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ शुरू किया है. यहां जैव विविधता, वनस्पति, पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ समझने का मौका मिलेगा, साथ ही छात्रों और आम लोगों के लिए सीखने की सुविधा होगी.
लखनऊ: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को लखनऊ स्थित महार्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर में CSIR-NBRI के ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ को राष्ट्र को समर्पित किया. इसे देश का अपनी तरह का पहला इको-एजुकेशनल हब बताया गया है. इसका उद्देश्य विज्ञान को प्रयोगशालाओं से बाहर समाज तक पहुंचाना है. यहां पौधों, जैव विविधता और भारत की सांस्कृतिक विरासत को लोगों के लिए रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है. छात्र, शोधकर्ता, शिक्षक और प्रकृति प्रेमी यहां सीधे सीख सकेंगे.
जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों की गतिविधियां केवल प्रयोगशालाओं और परिसरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. डिजिटल और सोशल मीडिया के जरिए नई तकनीकों और सफल पहलों को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है. इससे किसान, उद्यमी, विद्यार्थी और उद्योग जगत वैज्ञानिक समाधानों से जुड़ सकेंगे. उन्होंने अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों के बीच समान परियोजनाओं को जोड़ने पर भी जोर दिया, ताकि शोध का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंचे.
PAaVan Path बनेगा प्रकृति को समझने का जरिया
‘प्रकृति ज्ञान धाम’ में PAaVan Path यानी Plants and Associated Vegetations for Appreciating Nature नाम का विशेष हेरिटेज ट्रेल बनाया गया है. यह पूरे परिसर का प्रमुख आकर्षण है. इस रास्ते पर देश के अलग-अलग पारिस्थितिक क्षेत्रों से जुड़े पौधों और वनस्पतियों का संग्रह तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य लोगों को केवल पौधे दिखाना नहीं, बल्कि उनके पर्यावरणीय महत्व और आपसी संबंधों को आसान तरीके से समझाना है.
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एक बगीचे में सिमटी भारत की ऐतिहासिक विरासत
हब के Indian Heritage Garden में देश के ऐतिहासिक स्थलों से जुड़े पेड़ों की वंशज पौध सामग्री रखी गई है. इनमें फतेहपुर का Bawan Imli इमली का पेड़, लखनऊ का Mother Dussehri आम, प्रयागराज का Patalpuri बरगद और चंपारण के भितिहरवा में महात्मा गांधी द्वारा लगाए गए आम के पेड़ की वंश परंपरा शामिल है. गुजरात में दांडी मार्च के ऐतिहासिक मार्ग से जुड़े पेड़ों के वंशज भी यहां मौजूद हैं.
QR कोड से मिलेगी पेड़ों की पूरी कहानी
हेरिटेज गार्डन को तकनीक से भी जोड़ा गया है. यहां लगाए गए QR आधारित ऑडियो सिस्टम के जरिए लोग अपने स्मार्टफोन पर पेड़ों से जुड़ी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वनस्पति संबंधी जानकारी सुन सकेंगे. इससे पूरा परिसर एक इंटरैक्टिव लर्निंग स्पेस में बदल जाता है. हब में Bamboosteum भी बनाया गया है, जहां देशी और विदेशी बांस की 43 प्रजातियां रखी गई हैं. यह बांस के पर्यावरण और आजीविका से जुड़े उपयोगों को दिखाता है.
विज्ञान से समाज तक पहुंची नई तकनीक
कार्यक्रम में विज्ञान को समाज और बाजार से जोड़ने वाली कुछ तकनीकों और उत्पादों को भी लॉन्च किया गया. इनमें पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा एक हर्बल फॉर्मुलेशन शामिल है, जिसे CSIR-NBRI ने Himalaya के सहयोग से विकसित किया है. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार जीएन सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा के कुलपति अजीत कुमार शासनी, CSIR-NBRI और CSIR-IIIM जम्मू के निदेशक जाबीर अहमद समेत कई अधिकारी मौजूद रहे.