नोएडा के श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन, वेतन विवाद से लेकर सड़क पर बवाल तक; जनिए इस मुद्दे से जुड़ी 10 बड़ी बातें

नोएडा में बीते दिनों चल रहे प्रर्दशन ने हिंसक रूप ले लिया है. मजदूरों का विरोध कई बातों से जुड़ा है. आईए जानते हैं कि वेतन से लेकर इस प्रर्दशन से जुड़े 10 बड़े कारण.

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Ashutosh Rai

नोएडा के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सोमवार की सुबह भारी अफरातफरी मच गई. वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर फैक्ट्री मजदूरों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में तब्दील हो गया. बढ़ती महंगाई के बीच लंबे समय से रुकी हुई वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य स्थितियों की मांग कर रहे इन श्रमिकों का गुस्सा इस कदर फूटा कि सड़कों पर पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं देखने को मिलीं. आईए जानते हैं इस गुस्से से जुड़े 10 बड़े कारण.

शांतिपूर्ण शुरुआत से भड़की हिंसा

यह प्रदर्शन सोमवार सुबह नोएडा के फेज-2 (होजरी कॉम्प्लेक्स), सेक्टर 60, 62 और 84 में शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था. मजदूर मदरसन समेत कई यूनिट्स के बाहर नारेबाजी कर रहे थे, लेकिन पुलिस के साथ हुई बहस के बाद भीड़ उग्र हो गई और प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया.

रुकी हुई वेतन वृद्धि

इस पूरे बवाल की जड़ लंबे समय से पेंडिंग सैलरी रिवीजन है. मजदूरों का कहना है कि आसमान छूती महंगाई के बीच उनके वेतन में कोई इजाफा नहीं किया गया है, जिससे घर का खर्च चलाना और बुनियादी जरूरतें पूरी करना लगभग असंभव हो गया है.

काम करने के हालात और अन्य मांगें

सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि मज़दूर काम करने के बेहतर हालात, सम्मानजनक बर्ताव और एक सुरक्षित फाइनेंशियल स्ट्रक्चर की भी मांग कर रहे हैं ताकि उनका जीवन स्तर सुधर सके.

आगजनी और भारी तोड़फोड़

आक्रोशित भीड़ ने सड़क पर जमकर बवाल काटा. इस दौरान पत्थरबाजी की गई और कम से कम एक कार समेत कुछ अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. पब्लिक और प्राइवेट दोनों तरह की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है.

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर लगा भीषण जाम

प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-9 और दिल्ली को जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. इसके चलते सोमवार सुबह ऑफिस जाने वाले हजारों लोग कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम में फंस गए. इसका असर फरीदाबाद के रूट्स पर भी दिखा.

पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती

हालात को बेकाबू होता देख गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत एक्शन लिया. प्रभावित इलाकों में भारी पुलिस बल, रैपिड रिस्पॉन्स टीम और पैरामिलिट्री फोर्स को तैनात किया गया है. दिल्ली के एंट्री पॉइंट्स पर चेकिंग सख्त कर दी गई है.

प्रशासन ने एक दिन पहले ही लिए थे कई अहम फैसले

दिलचस्प बात यह है कि रविवार को ही जिला प्रशासन और औद्योगिक प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक हुई थी. इसमें मज़दूरों के हित में कई फैसले लिए गए थे, लेकिन यह जानकारी ज़मीन पर काम कर रहे मजदूरों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई या वे इससे संतुष्ट नहीं हुए.

डबल ओवरटाइम और 10 तारीख को सैलरी का वादा

रविवार की बैठक में यह तय किया गया था कि मज़दूरों को अब डबल ओवरटाइम दिया जाएगा. साथ ही, हर महीने की 10 तारीख तक सभी के बैंक खातों में सैलरी आनी सुनिश्चित की जाएगी और अनिवार्य रूप से 'वीकली ऑफ' (साप्ताहिक अवकाश) मिलेगा.

बोनस और सुरक्षा पर सहमति

प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए थे कि सभी मज़दूरों को 30 नवंबर से पहले उनका रुका हुआ बोनस दे दिया जाए. फैक्ट्रियों के गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और शिकायतों के निपटारे के लिए एक मजबूत सिस्टम बनाने के भी निर्देश दिए गए थे.

क्या हैं मौजूदा हालात?

पुलिस के अनुसार, फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कम से कम बल प्रयोग कर शांति बहाल की जा रही है. प्रशासन ने अफवाहों को रोकने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया है और चार हेल्पलाइन नंबर (1202978231, 1202978232, 1202978862, 1202978702) जारी किए हैं ताकि किसी भी स्थिति को तुरंत संभाला जा सके.