नोएडा हिंसा: पुलिस पर हमले और मिर्च पाउडर की थी प्लानिंग; नकाबपोशों ने रची थी खौफनाक साजिश
नोएडा में हुई हालिया हिंसा की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. पुलिस को मिले व्हाट्सएप चैट और ऑडियो संदेशों से पता चला है कि मजदूरों की आड़ में नकाबपोशों ने पुलिस पर हमले और मिर्च पाउडर के इस्तेमाल की पूर्व-नियोजित साजिश रची थी.
नोएडा: नोएडा में बीते सोमवार को हुई भीषण हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिसिया जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. जांच के दौरान यह बात उभरकर सामने आई है कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में बड़ी संख्या में नकाबपोश तत्व शामिल थे, जो वेतन वृद्धि की मांग कर रहे निर्दोष मजदूरों की आड़ में सुनियोजित तरीके से उत्पात मचा रहे थे. पुलिस को अब ऐसे पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं, जो इस पूरी हिंसा के पीछे एक गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं.
'कल पुलिस पर हमला करना है' - व्हाट्सएप चैट से हुआ खुलासा
नोएडा पुलिस की तकनीकी जांच में कई ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप सामने आए हैं, जो हिंसा भड़कने से ठीक तीन दिन पहले सक्रिय किए गए थे. इन ग्रुपों में साझा किए गए संदेश दंगाइयों की हिंसक मानसिकता को बयां कर रहे हैं. पुलिस के हाथ एक ऐसा ऑडियो लगा है जिसमें एक शख्स भीड़ को उकसाते हुए स्पष्ट कह रहा है, 'कल, भाई पुलिस वालों पर हमला करना है.' इतना ही नहीं, इंस्टाग्राम पर भी कुछ संदेश वायरल किए गए थे जिनमें पुलिस के लाठीचार्ज के विरोध में सभी प्रदर्शनकारियों को अपने साथ भारी मात्रा में मिर्च पाउडर लाने की हिदायत दी गई थी.
सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी कैमरों पर वार
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि यह उपद्रव अचानक नहीं भड़का था. सीसीटीवी फुटेज और वीडियो में देखा गया कि नकाबपोश उपद्रवियों ने लाठियों से कैमरों पर हमला किया. उनका मुख्य उद्देश्य पहचान छिपाना और हिंसा के डिजिटल सबूतों को पूरी तरह मिटाना था. पुलिस अब इन फुटेज के आधार पर चेहरों की पहचान करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है.
वेतन वृद्धि के बावजूद शांत नहीं हुआ आक्रोश
उल्लेखनीय है कि नोएडा के सेक्टर-60 और 62 के औद्योगिक क्षेत्रों में सोमवार को निजी कंपनियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए थे, जिससे घंटों ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त रही और आगजनी की घटनाएं हुईं. हालांकि, स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है, जिसके अंतरिम आदेश 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे.
इस नई नीति के तहत अलग-अलग श्रेणियों में अधिकतम 3000 रुपये तक का इजाफा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद मजदूर वर्ग में असंतोष की लहर कम नहीं हुई है.
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