देवताओं को भी दुर्लभ है निकुंज अष्टयाम लीला का दिव्य दर्शन, श्री पहाड़ी बाबा गौशाला में दिखा भक्तिमय वातावरण
कार्यक्रम में गोलोक धाम के महाराज जी, संत रसिक माधव दास जी महाराज, अनुराग दास जी सहित अनेक संत-महंत एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला।
वृंदावन। श्री पहाड़ी बाबा गौशाला में संत शिरोमणि श्री मलूक दास जी महाराज के 452वें जयंती महोत्सव के अवसर पर आयोजित श्री सीताराम जी की निकुंज अष्टयाम लीला दर्शन में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। इस दौरान श्रीमद जगद्गुरु डॉ. राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज ने चतुर्थ याम लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि निकुंज लीला का दर्शन एवं श्रवण देवताओं के लिए भी अत्यंत दुर्लभ है।
उन्होंने बताया कि भगवान की इन गूढ़ लीलाओं का अनुभव केवल उन्हीं रसिक भक्तों को प्राप्त होता है, जिन पर युगल सरकार की विशेष कृपा होती है। डॉ. देवाचार्य ने कहा कि लगभग 225 वर्ष पूर्व अयोध्या स्थित कनक भवन में जब पहली बार अष्टयाम लीला का आयोजन हुआ था, तब भी इसके श्रवण और दर्शन के लिए कठोर नियम और अर्हताएं निर्धारित की गई थीं। यह इस बात का प्रमाण है कि इन लीलाओं का महत्व और आध्यात्मिक गूढ़ता अत्यंत उच्च कोटि की है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ठाकुर श्री सीताराम जी की राजभोग सेवा का भी अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए युगल सरकार के विग्रह का पूजन एवं राजभोग सेवा अर्पित की।
कार्यक्रम में गोलोक धाम के महाराज जी, संत रसिक माधव दास जी महाराज, अनुराग दास जी सहित अनेक संत-महंत एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला।