'कस्टमर सपोर्ट' बनकर आया मैसेज, APK फाइल इंस्टॉल करते ही खाते से गायब हो गई प्लॉट की पूरी रकम
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. 17 वर्षीय छात्र ने गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजकर कॉल किया, लेकिन खुद को अस्पताल कर्मचारी बताने वाले ठग ने व्हाट्सऐप पर APK फाइल भेज दी.
मुरादाबाद में गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च करना एक परिवार के लिए भारी पड़ गया. दांतों के इलाज के लिए अपॉइंटमेंट लेने की कोशिश कर रहे 17 वर्षीय छात्र को साइबर ठगों ने अस्पताल का कर्मचारी बनकर अपने जाल में फंसा लिया. व्हाट्सऐप पर भेजी गई एक APK फाइल ने कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये की जमा पूंजी साफ कर दी.
हैरानी की बात यह है कि छात्र के खाते में उसकी मां द्वारा बेचे गए प्लॉट की रकम जमा थी. ठग ने नंबर बुक करने का बहाना बनाया, फर्जी फॉर्म भरवाया और फिर ओटीपी हासिल कर लिया. इसके बाद खाते से 10,27,086 रुपये दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए. अब पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है.
गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजते ही शुरू हुआ पूरा खेल
कटघर थाना क्षेत्र के गांव बरवारा मझरा निवासी नाजिम खान ने पुलिस को बताया कि उनका 17 वर्षीय भतीजा 12वीं कक्षा का छात्र है. 11 जुलाई को उसे दांतों के इलाज के लिए डॉक्टर से समय लेना था. उसने गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजकर कॉल किया. फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और अपॉइंटमेंट के लिए एक फॉर्म भरने की बात कही.
Also Read
- UP Weather: यूपी में फिर बदला मौसम का मिजाज, लखनऊ समेत 40 से ज्यादा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
- काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्ति और देशभक्ति का अनोखा मेल, बाबा विश्वनाथ का किया गया तिरंगा स्वरूप में विशेष श्रृंगार
- प्रयागराज में फर्जी वकीलों पर बड़ा शिकंजा, 100 के खिलाफ FIR; जांच में सामने आई चौंकाने वाली डिग्रियां
व्हाट्सऐप पर आई APK फाइल, यहीं से ठगों को मिला रास्ता
कॉल के कुछ ही देर बाद छात्र के व्हाट्सऐप पर "कस्टमर सपोर्ट" नाम से एक APK फाइल भेजी गई. सामने वाले ने उसे मोबाइल में इंस्टॉल कराने के बाद नाम, मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी भरवाई. छात्र को लगा कि यह अस्पताल की आधिकारिक प्रक्रिया है, इसलिए उसने बिना शक किए सभी निर्देश मान लिए.
एक ओटीपी ने खाली कर दिया पूरा बैंक खाता
फॉर्म भरने के बाद छात्र के मोबाइल पर एक ओटीपी आया. ठग ने कहा कि डॉक्टर के यहां नंबर कन्फर्म करने के लिए यह कोड जरूरी है. जैसे ही छात्र ने ओटीपी बताया, उसके बैंक खाते से 10 लाख 27 हजार 86 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए. यह रकम उसकी मां द्वारा प्लॉट बेचने के बाद उसी खाते में जमा कराई गई थी.
शिकायत के बाद हरकत में आई साइबर पुलिस
लेनदेन की जानकारी मिलते ही छात्र ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद उसके चाचा नाजिम खान ने साइबर क्राइम थाने में लिखित तहरीर दी. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ साइबर ठगी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पुलिस की सलाह: APK फाइल और ओटीपी से रहें सतर्क
एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार की मानें तो मामले की जांच जारी है और पैसे ट्रांसफर होने की पूरी श्रृंखला खंगाली जा रही है. पुलिस ने लोगों से अपील की है कि गूगल पर मिले किसी भी नंबर की पुष्टि किए बिना भरोसा न करें, व्हाट्सऐप पर आई APK फाइल कभी इंस्टॉल न करें और किसी भी परिस्थिति में अपना ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें.