KGMU में आधी रात आग का तांडव, धुएं में घिरे 50 बच्चे; गोद में उठाकर भागे परिजन
लखनऊ के केजीएमयू में बिजली पैनल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने के बाद धुआं बच्चों के वार्ड तक पहुंच गया. डॉक्टरों और कर्मचारियों ने करीब 50 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला.
लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में गुरुवार देर रात बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट के बाद आग लगने से अफरातफरी मच गई. बेसमेंट से उठा धुआं डक्ट और खिड़कियों के रास्ते पहली मंजिल के पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड तक पहुंच गया. देखते ही देखते वार्ड धुएं से भर गया. वहां भर्ती बच्चों को डॉक्टरों, कर्मचारियों और परिजनों ने मिलकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. ICU में भर्ती मरीजों को भी एहतियातन दूसरी जगह ले जाया गया.
मासूमों को लेकर बाहर भागे परिजन
रात करीब एक बजे वार्ड में अचानक धुआं भरने लगा. कई बच्चे सो रहे थे, जबकि कुछ ऑक्सीजन या ड्रिप के सहारे थे. डॉक्टरों और कर्मचारियों ने तुरंत वार्ड खाली कराना शुरू किया. परिजन अपने बच्चों को गोद में उठाकर बाहर निकले. किसी को सीढ़ियों से तो किसी को दूसरे रास्ते से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया. करीब 50 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया और ICU के मरीजों को भी स्थानांतरित किया गया.
फायर ब्रिगेड ने तीन घंटे में बुझाई आग
जनरल सर्जरी विभाग के बेसमेंट में बिजली के पैनल में शॉर्ट सर्किट के बाद तेज धमाका हुआ था. सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां अस्पताल पहुंचीं. करीब तीन घंटे तक बचाव और आग बुझाने का काम चला. बिजली आपूर्ति बंद होने से कुछ समय के लिए वार्ड में अंधेरा भी छा गया. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घटना में किसी बच्चे या तीमारदार के घायल होने की सूचना नहीं है.
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फायर अलार्म को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए. तीमारदारों ने आरोप लगाया कि समय पर फायर अलार्म नहीं बजा और अग्निशमन प्रणाली भी सक्रिय नहीं हुई. उनका कहना है कि अलार्म काम करता तो लोगों को पहले ही खतरे की जानकारी मिल सकती थी. इसी बीच अस्पताल प्रशासन ने विद्युत व्यवस्था की जांच शुरू करा दी है, ताकि घटना के कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित कमियों का पता लगाया जा सके.
दूसरे वार्ड में भी धुएं से हड़कंप
शुक्रवार सुबह आर्थोपेडिक्स सर्जरी ब्लॉक के दूसरे तल पर दीवार के पंखे में शॉर्ट सर्किट से धुआं फैल गया. सुरक्षा के लिए मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की मदद से आसपास के वार्डों में पहुंचाया गया. संबंधित तल पर चार वार्ड जुड़े हैं, जिनमें कुल 66 बेड हैं. प्रशासन ने आसपास के मरीजों को भी एहतियातन सुरक्षित कराया और विद्युत व्यवस्था की जांच शुरू की.
फायर सेफ्टी की होगी तत्काल जांच
कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने फायर सेफ्टी से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने सभी भवनों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए. फायर अलार्म, धुआं पहचानने वाले उपकरण और आग बुझाने वाली प्रणाली को दुरुस्त रखने पर जोर दिया गया. साथ ही नियमित सुरक्षा जांच और अभ्यास कराने को कहा गया, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके.