39 दिन पहले हो चुका था अंतिम संस्कार, अचानक जिंदा लौट आया बेटा; जानें क्या है पूरा मामला
गाजियाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस युवक का अंतिम संस्कार कर परिवार तेरहवीं तक की सभी रस्में पूरी कर चुका था, वह 39 दिन बाद अचानक जिंदा घर लौट आया.
गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट के घर लौटने से पूरा परिवार भावुक हो उठा. जिस बेटे की तस्वीर पर माला चढ़ चुकी थी, जिसकी तेरहवीं हो चुकी थी और जिसके नाम पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था, उसके अचानक सामने आ जाने से परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए. वहीं पड़ोसी भी इस अप्रत्याशित घटनाक्रम को देखकर हैरान रह गए.
यह मामला किसी फिल्मी कहानी जैसा जरूर लगता है, लेकिन इसकी सच्चाई ने पुलिस और स्थानीय लोगों को भी उलझन में डाल दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार गिरधर समझकर किया गया था, आखिर उसकी पहचान क्या है.
दुकानदारों से विवाद के बाद पहुंचे थे जेल
परिजनों के अनुसार, 16 मई को मानसिक रूप से कमजोर बताए जा रहे गिरधर सिंह बिष्ट का स्थानीय दुकानदारों से विवाद हो गया था. सूचना मिलने पर कौशांबी पुलिस ने शांति भंग की आशंका के तहत उन्हें हिरासत में लिया और कानूनी कार्रवाई करते हुए डासना जेल भेज दिया. करीब पांच दिन बाद 21 मई को वह जेल से रिहा हुए, लेकिन सीधे घर नहीं पहुंचे. इसके बाद परिवार ने रिश्तेदारों, परिचितों और अन्य संभावित स्थानों पर उनकी तलाश शुरू की. कई दिनों तक खोजबीन के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला, जिससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती चली गई.
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अज्ञात शव को समझ लिया था गिरधर
इसी दौरान 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली. पहचान के लिए पुलिस ने गिरधर के परिजनों को बुलाया. परिवार ने शव को गिरधर का मान लिया. पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया गया और तेरहवीं तक की सभी रस्में भी पूरी कर दी गईं. परिवार और रिश्तेदारों ने मान लिया कि गिरधर अब इस दुनिया में नहीं रहे. परिजनों को गिरधर की मौत पर संदेह था. उनका आरोप था कि उनकी हत्या की गई है.
इस मामले में उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन भी किया. बाद में मसूरी थाने में कुछ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया. मामले की जांच आगे बढ़ी, कई संदिग्धों से पूछताछ की गई और कई परिवारों पर हत्या के आरोपों की छाया पड़ गई. जांच लगातार गंभीर होती जा रही थी, लेकिन किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि पूरा मामला अचानक पलट जाएगा.