'निर्माण नहीं, बारिश है जिम्मेदार', कानपुर-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे धंसने पर कंपनी की सफाई
कानपुर-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों के धंसने पर निर्माण कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक ने तकनीकी खामी से इनकार किया है. कंपनी ने भारी बारिश और जलभराव को नुकसान की वजह बताते हुए मरम्मत का पूरा खर्च खुद उठाने की बात कही.
कानपुर-लखनऊ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क धंसने की घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. इस बीच परियोजना का निर्माण करने वाली पीएनसी इंफ्राटेक ने अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा है कि नुकसान निर्माण दोष से नहीं, बल्कि लगातार हुई भारी बारिश और जलभराव के कारण हुआ है.
कंपनी ने निर्माण गुणवत्ता का किया बचाव
पीएनसी इंफ्राटेक ने स्पष्ट किया कि एक्सप्रेसवे का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत किया गया था और इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित सभी तकनीकी मानकों और गुणवत्ता संबंधी नियमों का पालन किया गया. कंपनी का कहना है कि सड़क के निर्माण में किसी तरह की तकनीकी कमी नहीं छोड़ी गई थी. उसके अनुसार, मौजूदा नुकसान असामान्य वर्षा और लंबे समय तक पानी जमा रहने का परिणाम है, जिससे कुछ स्थानों पर मिट्टी बैठ गई.
भारी बारिश को बताया मुख्य कारण
कंपनी का कहना है कि लगातार हुई तेज बारिश के कारण कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी. इसी वजह से सड़क के नीचे की मिट्टी प्रभावित हुई और कुछ स्थानों पर सड़क धंस गई. कंपनी ने दोहराया कि यह समस्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता या इंजीनियरिंग की खामी से नहीं जुड़ी है. उसका दावा है कि परियोजना को तय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया था और मौसम की असाधारण परिस्थितियों ने यह स्थिति पैदा की.
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मरम्मत का खर्च खुद उठाएगी कंपनी
पीएनसी इंफ्राटेक ने बताया कि प्रभावित हिस्सों में मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है. कंपनी के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही जारी है और यातायात पूरी तरह बाधित नहीं हुआ है. मरम्मत पर आने वाला पूरा खर्च कंपनी अपनी संचालन एवं रखरखाव जिम्मेदारी के तहत वहन करेगी. इससे एनएचएआई पर किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ का असर नहीं पड़ेगा.
घटना के बाद उठ रहे बड़े सवाल
हालांकि कंपनी ने अपनी ओर से सफाई दे दी है, लेकिन इस घटना ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर बहस छेड़ दी है. लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण पूरी तरह मानकों के अनुरूप हुआ था, तो पहली ही तेज बारिश में सड़क को इतना नुकसान कैसे हुआ. फिलहाल मरम्मत का काम जारी है, लेकिन इस घटना ने भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं.