International Tiger Day: चित्रकूट में बाघ संरक्षण की उपलब्धियां और भविष्य की रणनीति पर प्रदेश भर के विशेषज्ञ करेंगे मंथन
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर चित्रकूट में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार बाघ संरक्षण की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करेगी.
चित्रकूट: अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के चित्रकूट स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व के तत्वावधान में राज्यस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में होने वाले इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश सरकार बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों, वर्तमान प्रयासों और भविष्य की रणनीति को प्रस्तुत करेगी. कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के साथ साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी को मजबूत करना भी है.
कार्यक्रम का शुभारंभ वन राज्यमंत्री केपी मलिक करेंगे. इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस की थीम "आदिवासी लोगों और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर बाघों के भविष्य को सुरक्षित करना" रखी गई है. यह विषय इस बात पर जोर देता है कि बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा में स्थानीय लोगों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. प्रदेश सरकार इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सामुदायिक भागीदारी को संरक्षण अभियान का प्रमुख आधार बना रही है.
क्या-क्या है प्लानिंग?
कार्यक्रम के दौरान रानीपुर टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण और नए लोगो का अनावरण किया जाएगा. इसके अलावा वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदर्शनी, जनजागरूकता अभियान, छात्र छात्राओं के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं और संरक्षण से जुड़े कई विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे. इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा.
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कितनी है बाघों की संख्या?
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बाघों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. वर्ष 2006 में प्रदेश में 109 बाघ थे. वर्ष 2010 में यह संख्या बढ़कर 118 हुई, जबकि वर्ष 2014 में 117 बाघ दर्ज किए गए. वर्ष 2018 की गणना में बाघों की संख्या 173 पहुंची और वर्ष 2022 में यह बढ़कर 205 हो गई. इसी उपलब्धि के आधार पर उत्तर प्रदेश देश में बाघों की संख्या के मामले में आठवें स्थान पर पहुंच गया है. रानीपुर को वर्ष 2022 में प्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी के अनुसार बाघों की बढ़ती संख्या के पीछे प्राकृतिक आवास का बेहतर प्रबंधन, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, घास के मैदानों का विकास और प्राकृतिक शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाने जैसे प्रयासों की अहम भूमिका रही है. इन उपायों से बाघों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है.
कब से हुई इस कार्यक्रम की शुरूआत?
मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष कम करने में बाघ मित्र कार्यक्रम भी प्रभावी साबित हो रहा है. इसकी शुरुआत वर्ष 2019 में पीलीभीत टाइगर रिजर्व से हुई थी. इस योजना के तहत स्थानीय ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर वन विभाग के साथ जोड़ा गया है. अक्टूबर 2023 में मुख्यमंत्री द्वारा 'बाघ मित्र' एप भी शुरू किया गया, जिसके माध्यम से ग्रामीण बाघ या अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर उनकी फोटो और लोकेशन तुरंत वन विभाग तक पहुंचा सकते हैं.