सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का वंदे मातरम को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है. एक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह यह गीत नहीं गाएंगे, लेकिन इसके सम्मान में खड़े रहेंगे. उन्होंने अपने धार्मिक विश्वास और संविधान में मिले अधिकारों का हवाला भी दिया.
इमरान मसूद ने कहा कि उन्होंने पहले भी वंदे मातरम नहीं गाया और आगे भी ऐसा नहीं करेंगे. उनका कहना है कि वह केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार चलने का अधिकार संविधान देता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम के सम्मान में वह खड़े रहेंगे. उन्होंने लोगों से कहा कि जिन्हें इस गीत से प्रेम है, वे इसे गाएं, उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है.
अपने बयान में इमरान मसूद ने राष्ट्रगान को सर्वोच्च बताते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्रगान का महत्व सबसे ऊपर है और वंदे मातरम को लेकर अनावश्यक दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए. मसूद ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस के अधिवेशनों में वंदे मातरम गाया जाता रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को यह गीत गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और देशभक्ति को केवल एक गीत से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
इमरान मसूद का नाम इससे पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर सामने आता रहा है. 2025 में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने भगत सिंह की तुलना हमास से किए जाने वाले बयान को लेकर राजनीतिक विरोध का सामना किया था. बाद में उन्हें इस मामले में सफाई देनी पड़ी थी. उसी साल लाल किले के पास कार विस्फोट मामले में आरोपी डॉक्टर उमर को लेकर दिए गए उनके बयान पर भी विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे और उन पर आतंकवाद को कमतर आंकने का आरोप लगाया था.
इमरान मसूद के पुराने बयानों को लेकर भी कई बार राजनीतिक विवाद हुए हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनकी एक सभा का वीडियो सामने आया था, जिसमें समुदाय विशेष को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद हुआ था. 2014 के चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को लेकर उनकी आपत्तिजनक टिप्पणी वाला वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा था और उन्होंने सफाई दी थी. 2014 में सहारनपुर के सांप्रदायिक दंगों के दौरान भी उन पर भीड़ को भड़काने और हिंसा से जुड़े आरोप लगे थे, हालांकि बाद में उन्होंने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखा था.