कष्ट नहीं देखा जाता... बीमार बच्ची को चिट्ठी के साथ अस्पताल में छोड़ा, गरीब मां-बाप की ये कहानी रुला देगी

Gorakhpur Hospital: गोरखपुर मेडिकल कॉलेज से हैरान करने वाली एक खबर आई है. इलाज में असमर्थ एक माता-पिता ने अपनी बीमार बच्ची को लावारिस हालत में अस्पताल में छोड़ दिया. बच्ची के पास ही एक झोले में कुछ कपड़े रखे गए और उसमें एक चिट्ठी भी छोड़ी गई, जिसमें उन्होंने बच्ची के इलाज में असमर्थता जताई. ये भी लिखा गया कि अगर बच्ची न रहे, तो उसके अंग को दान कर दिया जाए.

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Gorakhpur Hospital: गोरखपुर के एक माता-पिता ने अपनी दो साल की बेटी को अस्पताल में लवारिस छोड़ दिया. जब बच्ची को अस्पताल के कर्मचारियों ने रोते हुए देखा, तो आसपास मौजूद लोगों से उसके बारे में पूछताछ की गई. जब लोगों ने बच्ची को पहचानने से इनकार कर दिया, तो अस्पताल के कर्मचारियों ने बच्ची के बारे में चाइल्ड लाइन को सूचना दी. चाइल्ड लाइन की टीम अस्पताल पहुंची और बच्ची को कब्जे में ले लिया. बच्ची के पास एक झोला पाया गया, जिसमें बच्ची के कपड़े थे औऱ एक चिट्ठी भी थी. चिट्ठी में जो कुछ लिखा था, उसे पढ़कर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए.

जानकारी मुताबिक, बच्ची के पास से जो चिट्ठी बरामद हुई, उसमें साफ तौर पर लिखा गया था कि कोई भी हमें (बच्ची के माता-पिता) ढूंढने की कोशिश न करे. चिट्ठी में जानकारी दी गई थी कि बच्ची बीमार है, उसका दीमाग सिकुड़ रहा है, जिसका इलाज काफी महंगा है और इसलिए हम इसका इलाज कराने में बिलकुल समर्थ नहीं है. इसलिए बच्ची को अस्पताल में भारी मन से छोड़कर जा रहे हैं. अगर बच्ची नहीं रही, तो उसका अंग दान कर दीजिएगा. 

सीसीटीवी फुटेज के जरिए माता-पिता तक पहुंचने की कोशिश

फिलहाल, 2 साल की मासूम चाइल्ड लाइन की कस्टडी में मौजूद है. उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज की गैलरी में लावारिस हालत में देखा गया था. चाइल्ड लाइन के अस्पताल पहुंचने के बाद सीसीटीवी फुटेज के जरिए मासूम के परिजन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद पुलिस भी बच्ची के परिजन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

आखिर माता-पिता की ओर से चिट्ठी में क्या-क्या लिखा?

चिट्ठी में माता-पिता ने बच्ची का नाम विपु कुमारी लिखा और उसकी जन्म तारीख के बारे में भी मेंशन किया. चिट्ठी के मुताबिक, बच्ची का जन्म 17 अगस्त 2022 है. चिट्ठी में लिखा गया कि...

डॉक्टर साहब... मुझे माफ कीजिएगा, मेरी बच्ची कभी ठीक नहीं हो पाएगी, इसलिए इसे अस्पताल और डॉक्टरों के हवाले कर रहा हूं. मुझे पता है कि मेरी बच्ची नहीं रहेगी, इसलिए इसके अंगों को दान कर दीजिएगा, जिससे किसी की जान बच जाएगी. 

प्लीज, हमें खोजने की कोशिश कोई न करे, क्योंकि मेरे पास बच्ची को अस्पताल में छोड़ने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है. मैं भारी मन से...दिल पर पत्थर रखकर बच्ची को आप लोगों के हवाले कर रहा हूं.

बच्ची की बीमारी के बारे में बताते हुए पैरेंट्स ने लिखा.... बच्ची का दीमाग सिकुड़ गया है, इसे झटके भी आते हैं. आगे बच्ची से माफी मांगते हुए लिखा गया कि मेरी बेटी मुझे माफ करना. बच्ची के कारण मेरी पत्नी और दूसरे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं.

बच्ची के छोड़े जाने पर अस्पताल ने क्या कहा?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर राम कुमार जायसवाल ने कहा कि अस्पताल और यहां मौजूद संसाधन जरूरतमंदों के लिए ही होते हैं. उन्होंने कहा कि बच्ची का इलाज हमारे मेडिकल कॉ़लेज में ही बिलकुल निशुल्क होगा. चाइल्ड लाइन को जब लगे कि उसे इलाज की जरूरत है, यहां लेकर आ सकती है.