गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट सिर्फ 40 मिनट! 29 स्टेशनों के साथ दौड़ेगी रैपिड-मेट्रो, देखें पूरा रूट
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक प्रस्तावित नमो भारत आरआरटीएस कॉरिडोर एनसीआर की कनेक्टिविटी बदल सकता है. करीब 72.44 किलोमीटर लंबे इस रूट पर 11 नमो भारत और 18 मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित हैं. ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है.
गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सफर करने वालों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. प्रस्तावित कॉरिडोर बनने के बाद गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र और जेवर एयरपोर्ट के बीच तेज सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा. हालांकि परियोजना अभी डीपीआर चरण में है और निर्माण शुरू होने में समय लगेगा.
11 स्टेशनों से जुड़ेगा नमो भारत कॉरिडोर
एनसीआरटीसी के प्रस्ताव के मुताबिक, गाजियाबाद-जेवर रूट पर नमो भारत के 11 स्टेशन बनाए जाएंगे. इनमें गाजियाबाद साउथ, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2, सेक्टर-3, सेक्टर-12, सूरजपुर, अल्फा-I, इकोटेक-VI, दनकौर, YEIDA नॉर्थ यानी सेक्टर-18, YEIDA सेंट्रल यानी सेक्टर-21 और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शामिल हैं. इन स्टेशनों के जरिए गाजियाबाद से लेकर जेवर तक तेजी से पहुंचने का रास्ता तैयार होगा. परियोजना का उद्देश्य सिर्फ एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ाना नहीं, बल्कि रास्ते में विकसित हो रहे रिहायशी, कारोबारी और औद्योगिक इलाकों को भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है.
मेट्रो के लिए 18 स्टेशन प्रस्तावित
इसी कॉरिडोर में लोकल मेट्रो सेवा के लिए 18 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें सिद्धार्थ विहार, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-16सी, इकोटेक-12, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4, ग्रेटर नोएडा सेक्टर-10, नॉलेज पार्क-V, पुलिस लाइन्स सूरजपुर, इकोटेक-2, नॉलेज पार्क-III, ओमेगा-II, फाई-III, इकोटेक-1ई, इकोटेक-VIII, दादूपुर, जुनेदपुर, YEIDA सेक्टर-17, YEIDA सेक्टर-15 और YEIDA सेक्टर-33 शामिल हैं. इस व्यवस्था की खासियत यह होगी कि एक ही कॉरिडोर पर तेज नमो भारत और लोकल मेट्रो, दोनों तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है.
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180 की रफ्तार, 40-50 मिनट में सफर
प्रस्तावित कॉरिडोर पर नमो भारत ट्रेनों को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की योजना है. इससे गाजियाबाद, नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 40 से 50 मिनट रह सकता है. परियोजना को दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस और नोएडा मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की भी योजना है. इसके पूरा होने पर एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ रोजाना काम, कारोबार और पढ़ाई के लिए इन इलाकों के बीच आवाजाही करने वाले लोगों को भी फायदा मिल सकता है. इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
20 हजार करोड़ से ज्यादा की परियोजना
गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट रैपिड मेट्रो को करीब 72.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड लाइन के रूप में विकसित करने की योजना है. परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 20,640 करोड़ रुपये बताई गई है. हालांकि अभी यह प्रोजेक्ट डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट यानी डीपीआर के चरण में है, इसलिए आगे की मंजूरी और प्रक्रिया के बाद ही निर्माण की तस्वीर साफ होगी. प्रस्तावित योजना के अनुसार निर्माण शुरू होने के बाद इसे करीब पांच साल में पूरा करने का अनुमान है. यह कॉरिडोर तैयार होने पर गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, यमुना क्षेत्र और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच एनसीआर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नया विकल्प देगा.