'अब नहीं होनी चाहिए लापरवाही', लखनऊ अग्निकांड के बाद सीएम योगी का बड़ा एक्शन; पूरे यूपी में होगा फायर सेफ्टी ऑडिट

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर में अग्निसुरक्षा मानकों की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं. चलिए जानते हैं सीएम ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए क्या दी चेतावनी.

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Km Jaya

लखनऊ: लखनऊ के अलीगंज में हुई दर्दनाक आग की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने अग्निसुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को बड़ा सबक बताते हुए प्रदेश के सभी जिलों में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर व्यापक जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अग्निसुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर अग्निसुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान पूरी तरह जनहित में संचालित किया जाएगा. पहले लोगों और संस्थानों को जागरूक किया जाएगा, उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि अभियान के नाम पर किसी भी नागरिक का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने क्या दिया निर्देश?

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार गठित एसआईटी में अग्निशमन विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, बिजली विभाग, पुलिस और संबंधित जिले के एसडीएम को शामिल किया जाएगा. यह टीम अस्पतालों, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी भवनों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच करेगी. जांच के दौरान अग्निसुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों और सुरक्षा मानकों के अनुपालन का विशेष ध्यान रखा जाएगा.


सीएम योगी ने प्रदेश के सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य करने के निर्देश भी दिए हैं. साथ ही कहा कि व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन विभाग से प्राप्त अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि भवनों का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए जिसके लिए उन्हें स्वीकृति मिली है.

सीएम ने क्या दी चेतावनी?

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जाएं. यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही किया जाए. इसके अलावा व्यावसायिक भवनों में विद्युत भार की भी जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई होगी.

बैठक में मुख्यमंत्री ने और क्या कहा?

बैठक में मुख्यमंत्री ने लखनऊ अग्निकांड की बिंदुवार समीक्षा करते हुए आपातकालीन सेवाओं के रिस्पांस टाइम को और कम करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि राहत और बचाव कार्यों की सफलता काफी हद तक समय पर पहुंचने पर निर्भर करती है. इसलिए सभी एजेंसियां उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करें.

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित घोष ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही 14 एम्बुलेंस मौके पर भेजी गई थीं. वहीं अग्निशमन सेवा के महानिदेशक सुजीत पांडेय ने बताया कि प्रदेश की 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं. 26 नए केंद्र शुरू होने के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य जारी है. मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.