लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के लोकसभा में पास न होने के विरोध में ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का नेतृत्व किया. यह पदयात्रा मुख्यमंत्री के सरकारी आवास से उत्तर प्रदेश विधानसभा तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और भाजपा नेताओं ने भाग लिया.
इस विरोध मार्च में राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्री, भाजपा के वरिष्ठ नेता और हजारों महिला समर्थक शामिल हुए. प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा संविधान के 131वें संशोधन विधेयक का लोकसभा में गिरना रहा, जिसे महिला आरक्षण से जुड़ा अहम प्रस्ताव माना जा रहा था. यह विधेयक संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके चलते इसे पारित नहीं किया जा सका.
#WATCH लखनऊ (यूपी): यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के साथ लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं होने पर सीएम आवास से यूपी विधानसभा तक 'जन आक्रोश महिला पदयात्रा' निकाली। pic.twitter.com/S1DlaSGkqu
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 21, 2026
जानकारी के अनुसार इस विधेयक का विरोध कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने किया. इन दलों ने मतदान के दौरान विधेयक के खिलाफ वोट दिया, जिसके कारण यह प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया.
पदयात्रा शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि यह मार्च महिलाओं के नेतृत्व में निकाला जा रहा है और इसका उद्देश्य उन राजनीतिक दलों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है, जिन पर उन्होंने महिला विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर आम जनता में खासकर महिलाओं में गुस्सा देखा जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों महिलाएं इस पदयात्रा में शामिल होकर अपना आक्रोश जता रही हैं और यह विरोध केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
इस प्रदर्शन के दौरान लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. प्रशासन ने यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की और कई मार्गों पर डायवर्जन भी लागू किया गया. पुलिस बल की तैनाती के साथ पूरे इलाके में निगरानी रखी गई. आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.