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आजम खान और उनके बेटे को झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, अभी जेल में ही कटेंगे दिन

यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवा लिए थे.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
आजम खान और उनके बेटे को झटका, कोर्ट ने जमानत देने से किया इनकार, अभी जेल में ही कटेंगे दिन
Courtesy: @Asifansari9410

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सेशन कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दो पैन कार्ड मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दाखिल उनकी अपील को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया. साथ ही उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की अपील भी नहीं मानी गई. निचली अदालत ने नवंबर 2025 में दोनों को सात साल के कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. फिलहाल दोनों रामपुर जिला जेल में बंद हैं और उन्हें राहत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही.

दो अलग जन्मतिथियों वाले पैन कार्ड से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग जन्म तिथियों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवा लिए थे. जांच के दौरान इसमें आजम खान की भूमिका भी सामने आई. एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को दोनों को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी. अदालत ने यह भी कहा था कि यह धोखाधड़ी जानबूझकर की गई थी, ताकि आय और संपत्ति के ब्योरे में हेराफेरी की जा सके.

सात महीने से जेल में बंद हैं बाप-बेटे 

निचली अदालत के फैसले के बाद 25 नवंबर 2025 को आजम और अब्दुल्ला ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी. करीब पांच महीने बाद 20 अप्रैल 2026 को यह अपील खारिज कर दी गई. फिलहाल दोनों नवंबर 2025 से रामपुर की जिला जेल में बंद हैं. वकीलों के मुताबिक, अबतक दोनों को किसी भी तरह की जमानत या राहत नहीं मिल पाई है. जेल प्रशासन के अनुसार, आजम खान की तबीयत भी पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं रह रही है, लेकिन उन्हें बाहरी इलाज की अनुमति नहीं दी गई है.

सितंबर 2025 में ही हुए थे रिहा

गौरतलब है कि आजम खान सितंबर 2025 में किसी दूसरे मामले में जेल से रिहा हुए थे. उस वक्त उनके बयानों ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. लेकिन रिहाई के महज 55 दिन बाद 18 नवंबर 2025 को उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा. यह झटका उनके लिए और भी बड़ा था क्योंकि वह उस समय सियासी गतिविधियों में वापसी की कोशिश कर रहे थे. सूत्रों के अनुसार, अब उनके वकील उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी.

क्या बदलेगा अब सियासी समीकरण? 

आजम खान उत्तर प्रदेश की सियासत के ऐसे नेता हैं जिनका प्रभाव रामपुर और आसपास के इलाकों में काफी माना जाता है. उनकी गिरफ्तारी और सजा के बाद समाजवादी पार्टी ने तो उनसे दूरी बना ली है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनके समर्थकों में मायूसी है. कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली तो आजम खान को आने वाले चुनावों में दूर रहना पड़ सकता है. फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या उच्च न्यायालय इस मामले में कोई राहत दे पाता है या नहीं.