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अयोध्या राम मंदिर में बड़ा एक्शन, रिश्तेदारों की भर्ती पर गिरेगी गाज; 100 कर्मचारियों की होगी छंटनी

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, एक ही परिवार के कई सदस्यों की नियुक्ति वाले मामलों की जांच की जा रही है और 100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है.

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Babli Rautela

अयोध्या स्थित श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी मामले के बाद बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है. ट्रस्ट अब मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा कर रहा है. सूत्रों के अनुसार, उपयोगी और अनुपयोगी कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर 100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी की जा सकती है.

सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावा चोरी के आरोपित रामशंकर यादव टिन्नू द्वारा अपने भतीजे को मंदिर परिसर में गणना कार्य में लगाने का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने अन्य नियुक्तियों की भी जांच शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि कई कर्मचारियों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर परिवार के सदस्यों को भी मंदिर में नौकरी दिलाई थी. जानकारी के अनुसार, कई परिवारों के दो या तीन सदस्य अलग-अलग विभागों और काउंटरों पर कार्यरत हैं. अब ऐसे मामलों की पहचान कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.

100 कर्मचारियों की सूची तैयार होने की चर्चा

सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों के रिश्तेदार भी विभिन्न काउंटरों और सेवाओं में कार्यरत हैं. ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 100 बताई जा रही है. इनकी अंतिम सूची तैयार की जा रही है और इस मुद्दे पर 2 सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट बैठक में फैसला लिया जा सकता है.


नियुक्ति के स्रोत खंगाले जा रहे

बताया जा रहा है कि अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के निर्देश पर कर्मचारियों की नियुक्ति के स्रोतों की जांच की जा रही है. अधिकारी विभिन्न काउंटरों का निरीक्षण भी कर रहे हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि किस कर्मचारी की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई थी. इनमें ट्रस्ट द्वारा सीधे नियुक्त कर्मचारी और विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से सेवा दे रहे कर्मचारी दोनों शामिल हैं.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कई बदलाव देखने को मिले हैं. इससे पहले 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट बैठक में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद आरएसएस के क्षेत्रीय संघ चालक और ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई. कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव शुरू किए हैं. इसी दौरान गोपाल राव को भी हटाया गया, जबकि चढ़ावा चोरी मामले में रामशंकर यादव टिन्नू, उसका भतीजा और मामले से जुड़े अन्य आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं.

ट्रस्ट की बैठक में हो सकता है अंतिम फैसला

ट्रस्ट फिलहाल कर्मचारियों के रिकॉर्ड और नियुक्तियों की समीक्षा में जुटा है. माना जा रहा है कि सितंबर में होने वाली ट्रस्ट बैठक में इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो एक ही परिवार के कई सदस्यों की नियुक्ति वाले मामलों में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है.