सपा विधायक अमिताभ बाजपेई पर FIR, स्कूल में अखिलेश का बर्थडे मनाना पड़ा भारी
कानपुर के परमट प्राइमरी स्कूल में अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. निलंबित प्रधानाध्यापक की शिकायत पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई के खिलाफ बीएनएस की धारा 132 के तहत एफआईआर दर्ज हुई है.
कानपुर: जनपद कानपुर के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है. कार्यक्रम के बाद पहले स्कूल के प्रधानाध्यापक को निलंबित किया गया और अब उसी प्रधानाध्यापक की शिकायत पर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इस घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था, राजनीतिक गतिविधियों और सरकारी संस्थानों के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
मामला परमट प्राइमरी स्कूल का है, जहां 1 जुलाई को सपा विधायक अमिताभ बाजपेई पहुंचे थे. वहां उन्होंने बच्चों के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव का जन्मदिन मनाया. कार्यक्रम के दौरान केक काटा गया, बच्चों को केक खिलाया गया और ड्रेस भी वितरित की गई. इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया.
प्रधानाध्यापक ने दर्ज कराई FIR
घटना के एक दिन बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक नवीन कुमार त्रिपाठी को निलंबित कर दिया गया. अब 7 जुलाई की शाम उन्होंने ग्वाल टोली थाने में विधायक अमिताभ बाजपेई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. आरोप लगाया गया कि विधायक बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के स्कूल परिसर में पहुंचे और जबरन राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया. पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है.
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बीएनएस की धारा 132 के तहत दर्ज हुआ केस
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 के तहत एफआईआर दर्ज की है. यह धारा ऐसे मामलों में लागू होती है, जहां किसी सरकारी कर्मचारी को उसका कर्तव्य निभाने से रोकने या उस पर आपराधिक बल प्रयोग करने का आरोप हो. अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी.
सपा विधायक ने सरकार पर लगाए आरोप
एफआईआर दर्ज होने से पहले ही अमिताभ बाजपेई ने प्रधानाध्यापक के निलंबन को सत्ता का दुरुपयोग बताया था. उन्होंने कहा कि एक निर्दोष शिक्षक को राजनीतिक कारणों से कार्रवाई का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि पहले किसी सरकारी स्कूल में राजनीतिक संदर्भ वाले कार्यक्रम हुए थे, तो उस समय प्रशासन ने समान कार्रवाई क्यों नहीं की.
राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज
यह मामला अब केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रह गया है. विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि प्रशासन नियमों के उल्लंघन की बात कर रहा है. ऐसे में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष पर सभी की नजरें टिकी हैं. यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है.