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4 दिन में 90% पिघला अमरनाथ का हिम शिवलिंग! आखिर क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह?

अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों में काफी छोटा हो गया है. विशेषज्ञ इसके पीछे बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों को प्रमुख कारण मान रहे हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण प्राकृतिक रूप से बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग होता है. इस बार यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसके तेजी से छोटे होने की खबर ने श्रद्धालुओं और पर्यावरण विशेषज्ञों दोनों की चिंता बढ़ा दी है. बढ़ते तापमान, बदलते मौसम और यात्रा मार्ग पर बढ़ती मानवीय गतिविधियों को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जा रहा है. इस घटनाक्रम ने हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण पर नई बहस छेड़ दी है.

29 जून को प्रथम पूजा के समय हिम शिवलिंग का आकार करीब 12 फीट बताया गया था. तीन जुलाई से यात्रा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं ने इसके लगातार छोटा होने की जानकारी दी. अब शिवलिंग का आकार काफी कम रह गया है. इससे यह सवाल फिर उठने लगा है कि आखिर हर साल यह प्राकृतिक हिम संरचना पहले की तुलना में तेजी से क्यों पिघल रही है.

बढ़ता तापमान बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा तापमान और जलवायु परिवर्तन इस बदलाव की मुख्य वजह हैं. मौसम के पैटर्न में बदलाव और ग्लोबल वॉर्मिंग का असर ऊंचाई वाले इलाकों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. यही कारण है कि आसपास के ग्लेशियर भी तेजी से पिघल रहे हैं और बर्फ लंबे समय तक टिक नहीं पा रही है.


सुविधाओं के विस्तार का भी असर

बीते कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रा को अधिक सुगम बनाने के लिए सड़कें चौड़ी की गईं, अस्थायी ढांचे बढ़े और अन्य सुविधाओं का विस्तार हुआ. इससे श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई. विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती मानवीय गतिविधियां स्थानीय तापमान और प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, जिसका असर हिम शिवलिंग के बनने और टिके रहने पर भी पड़ता है.

हर साल जल्दी पिघलने का बढ़ा सिलसिला

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हिम शिवलिंग पहले की तुलना में कम समय तक सुरक्षित रह पा रहा है. कभी इसका आकार 18 से 22 फीट तक पहुंचता था, लेकिन अब यह पहले से छोटा बनता है और जल्दी पिघल जाता है. इससे पर्यावरण में हो रहे बदलाव को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं.

पर्यावरण संरक्षण पर बढ़ी चिंता

अमरनाथ गुफा और उसके आसपास का क्षेत्र बेहद संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है. यदि जलवायु परिवर्तन और मानवीय दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो भविष्य में इस प्राकृतिक हिम शिवलिंग के अस्तित्व पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.