10 साल की बच्ची से दरिंदगी, हाईकोर्ट बोला- माफी योग्य नहीं, उम्रकैद बरकरार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी दरिंदगी माफी योग्य नहीं है और नाबालिग पीड़िता पर इस घटना का आजीवन प्रभाव रहेगा.
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 10 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के एक जघन्य मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी दरिंदगी माफी योग्य नहीं है और नाबालिग पीड़िता पर इस घटना का आजीवन प्रभाव रहेगा.
हाईकोर्ट बोला- माफी योग्य नहीं, उम्रकैद बरकरार
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि नाबालिग बच्ची के मन पर इस घृणित कृत्य का स्थायी असर पड़ेगा. ऐसे अपराधों में कठोर सजा ही उचित है.
कब और कैसे हुई घटना?
यह जघन्य वारदात 8-9 जुलाई 2014 की रात मुजफ्फरनगर जिले में हुई थी. पीड़िता की मां और पिता पशुओं के पास सो रहे थे. बच्ची अपनी चाची और अन्य बच्चों के साथ घर के अंदर सो रही थी. रात के अंधेरे में एक व्यक्ति बच्ची को उठाकर ले गया. सुबह जब बच्ची चारपाई पर नहीं मिली तो परिवार ने तलाश शुरू की. करीब साढ़े पांच बजे पड़ोसी ने बच्ची को घर पहुंचाया. उसकी हालत बेहद खराब थी. उसके शरीर पर दुष्कर्म और मारपीट के निशान साफ दिख रहे थे. होश में आने पर बच्ची ने पड़ोसी का नाम बताया. पुलिस ने थाना नई मंडी में मुकदमा दर्ज किया.
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कोर्ट का फैसला
मुजफ्फरनगर के विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) ने 24 अगस्त 2018 को आरोपी को दोषी करार दिया था. कोर्ट ने आरोपी को धारा 376 (दुष्कर्म), 323 (मारपीट) आईपीसी और POCSO एक्ट की धारा 5/6 के तहत उम्रकैद तथा 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है.