यूपी में 900 नई अदालतों के गठन पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा शपथ पत्र; जानें कब होगी अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित 900 नई अदालतों के गठन के मामले में मुख्य सचिव से शपथ पत्र और संबंधित शासनादेश प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रस्तावित 900 नई अदालतों के गठन के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले शपथ पत्र दाखिल कर इस संबंध में जारी शासनादेश अदालत के सामने प्रस्तुत किया जाए.
23 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की गई है. हाई कोर्ट ने यह आदेश स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया. इस मामले को प्रदेश में लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
सुनवाई के दौरान अदालत को क्या बताया गया?
यह मामला प्रदेश में कुल 9149 अदालतों के गठन से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 में पहले चरण के तहत 900 नई अदालतों के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. हालांकि अब तक इस संबंध में शासनादेश जारी होने और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है. इसी वजह से हाई कोर्ट ने सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है.
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लखनऊ खंडपीठ ने क्या दिया निर्देश?
खंडपीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के साथ यह भी बताया जाए कि नई अदालतों के गठन को लेकर अब तक क्या कार्रवाई की गई है. अदालत ने संबंधित शासनादेश भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने को कहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रस्तावित अदालतों की स्थापना की प्रक्रिया किस चरण में है. हाई कोर्ट का मानना है कि इस विषय पर स्पष्ट जानकारी न्यायिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है.
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि प्रस्तावित 900 नई अदालतों में 225 उच्च न्यायिक सेवा यानी एचजेएस की अदालतें, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालतें और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन की अदालतें शामिल हैं. इन अदालतों के गठन से विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है. साथ ही लोगों को समय पर न्याय मिलने की प्रक्रिया भी मजबूत हो सकती है.
क्या होगा इसका फायदा?
यदि इन अदालतों की स्थापना होती है तो न्यायालयों पर बढ़ते कार्यभार को कम करने और मामलों के शीघ्र निस्तारण में सहायता मिल सकती है. अब सभी की नजर 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर रहेगी, जब राज्य सरकार हाई कोर्ट के समक्ष अपना शपथ पत्र और संबंधित शासनादेश प्रस्तुत करेगी. इसके बाद अदालत आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है.