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'ये जीत नहीं, चोरी है… वोट चोर, गद्दी छोड़', बिहार चुनाव के नतीजों पर अखिलेश यादव का तंज

अखिलेश यादव ने बिहार चुनाव नतीजों पर वोट और सीटों के भारी अंतर को “चोरी” बताया. उन्होंने कहा कि आरजेडी को सबसे ज़्यादा वोट मिलकर भी कम सीटें मिलना लोकतांत्रिक संदेह पैदा करता है.

Anubhaw Mani Tripathi
'ये जीत नहीं, चोरी है… वोट चोर, गद्दी छोड़', बिहार चुनाव के नतीजों पर अखिलेश यादव का तंज
Courtesy: Social Media

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने पूरे राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है. महागठबंधन की करारी हार के बाद विपक्ष में नाराजगी का स्वर तेज हो गया है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक तीखा बयान देते हुए बिहार के परिणामों पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने वोटों और सीटों के अंतर का हवाला देते हुए कहा कि यह “जीत नहीं, बल्कि चोरी” है.

अखिलेश यादव ने अपने बयान में चुनाव परिणामों को लेकर गहरी आशंका जताई और महागठबंधन की हार पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जब आरजेडी को 1.8 करोड़ वोट मिले और उसे मात्र 25 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी को 96 लाख वोट मिलने पर 91 सीटें और जेडीयू को 90 लाख वोट पर 83 सीटें मिल सकती हैं, तो यह सामान्य नहीं कहा जा सकता. उनके बयान का सार था, “ये चोरी है, जीत नहीं.” इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “वोट चोर, गद्दी छोड़.”

वोट और सीटों का अंतर बना राजनीतिक विवाद का केंद्र

बिहार चुनाव में वोट शेयर और सीटों के बीच भारी अंतर ने कई राजनीतिक दलों को सवाल उठाने का मौका दिया है. आरजेडी को सबसे ज़्यादा वोट मिलने के बावजूद सीटों में पिछड़ जाना विपक्ष के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है. आरजेडी को जहाँ लगभग 22–23% वोट मिले, वहीं बीजेपी और जेडीयू का वोट जुटाव इससे काफी कम रहा, पर सीटों का गणित पूरी तरह उल्टा निकला.

अखिलेश यादव ने इसी अंतर को आधार बनाकर ईवीएम, चुनाव प्रक्रिया और सत्ता पक्ष की मंशा पर सवाल खड़े किए. उनका दावा है कि जनता के वास्तविक जनादेश को सीटों में बदलने में अनियमितता हुई है.

महागठबंधन की हार और प्रतिक्रिया

बिहार में आरजेडी-महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है. उम्मीदों के विपरीत नतीजों ने जहां तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठाना शुरू कर दिया है.

अखिलेश यादव का यह बयान विपक्ष की समग्र नाराज़गी को दर्शाता है. उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता का वोट सर्वोपरि होता है और यदि वोटों को सीटों में बदलते समय “गड़बड़ी” हो, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कमज़ोर होता है.

बिहार चुनाव 2025 के ये नतीजे अब सिर्फ सरकार गठन तक सीमित नहीं रहेंगे. वोट और सीटों के अंतर पर उठ रहे सवाल राजनीतिक तापमान को और बढ़ाने वाले हैं. अखिलेश यादव का बयान इस विवाद को नया मोड़ देता है, और आने वाले दिनों में इस पर और भी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल सकती हैं.