क्या यूपी चुनाव में फिर होगा बसपा-सपा का गठबंधन? भव्य कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने दिए संकेत

अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी के साथ रिश्तों में बढ़ती मजबूती का दावा किया है. उन्होंने 'पीडीए' के जरिए सामाजिक एकता पर जोर देते हुए आगामी चुनावों के लिए नए और मजबूत राजनीतिक समीकरणों के संकेत दिए हैं.

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Sagar Bhardwaj

उत्तर प्रदेश की बदलती सियासी सरगर्मी के बीच समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पुराने रिश्तों के फिर से जीवंत होने की चर्चाएं अचानक तेज हो गई हैं. रविवार को लखनऊ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि बसपा के साथ उनके संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और भविष्य में ये और भी गहरे होंगे. यह बयान उस समय आया है जब लगभग 15,000 लोगों ने विभिन्न दलों को छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली है.

पीडीए और भाईचारे का नया संदेश 

अखिलेश यादव ने होली के पावन पर्व से पहले आयोजित 'पीडीए' यानी प्रेम प्रसार समारोह में सामाजिक एकता का संदेश दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश की शांति और सर्वांगीण प्रगति की असली नींव इसी पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक एकता के अटूट स्तंभों पर टिकी हुई है. उनके अनुसार, सामाजिक सद्भाव ही वर्तमान समय की प्रगतिशील राजनीति की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन लोगों के बीच आपसी भाईचारे और सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया.

दिग्गज नेताओं का सपा में प्रवेश 

इस समारोह की सबसे बड़ी चर्चा पूर्व मंत्री नसीरुद्दीन सिद्दीकी का सपा में शामिल होना रही. सिद्दीकी किसी समय मायावती के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे और बसपा शासनकाल में चार बार महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. उनके साथ ही अपना दल (सोनेलाल) के पूर्व विधायक राजकुमार पाल ने भी सपा का दामन थामा. अखिलेश यादव का मानना है कि इन अनुभवी और जमीनी नेताओं के पार्टी में आने से पीडीए की भविष्य की संभावनाओं को अब एक नई और बड़ी ताकत मिलेगी.

अंबेडकर-लोहिया का सपना और गठबंधन

अखिलेश ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर और डॉ. राम मनोहर लोहिया के ऐतिहासिक साझा प्रयासों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों ने मिलकर राजनीति को एक नई सामाजिक दिशा देने की कोशिश की थी, लेकिन तत्कालीन परिस्थितियों ने उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया. हालांकि पूर्व में बसपा और सपा के गठबंधन बने और बाद में टूट भी गए, लेकिन अखिलेश अब भी काफी आशान्वित हैं. वह चाहते हैं कि आने वाले समय में वे सब मिलकर उस पुराने संघर्ष को फिर से नया जीवन और मजबूती प्रदान करें.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर प्रहार

 सियासी मंच से अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि एक पूज्य शंकराचार्य का अपमान किया गया है और वह दृढ़ता के साथ शंकराचार्य जी के सम्मान में खड़े हैं. उन्होंने बिना नाम लिए सत्ता पक्ष पर तंज कसा कि परंपराओं पर सवाल उठाना और दूसरों से 'सर्टिफिकेट' लेने की कोशिश करना अनुचित है. यह विवाद हाल ही में विधानसभा में योगी आदित्यनाथ द्वारा शंकराचार्य की उपाधि और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर दी गई टिप्पणियों के बाद और अधिक गहरा गया है.

2019 के अनुभवों से भविष्य की राह 

उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सपा और बसपा ने एक ऐतिहासिक गठबंधन किया था, जो चुनावी नतीजों के तुरंत बाद बिखर गया था. उस कड़वे अनुभव के बावजूद अखिलेश अब नए सिरे से विपक्षी एकता के धागे पिरो रहे हैं. वह इस नए जुड़ाव को केवल एक चुनावी समझौते के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्थायी सामाजिक आंदोलन के रूप में देख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि अगर यह तालमेल फिर से बैठता है, तो आगामी चुनावों में प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है.